
रेलवे के हाई-प्रोफाइल स्पोर्ट्स मीट में भारी लापरवाही का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां दूषित भोजन के कारण 150 से अधिक रेलवे अधिकारी बीमार पड़ गए। रविवार और सोमवार की रात अचानक उल्टी, चक्कर और पेट दर्द की शिकायतों से अफरा-तफरी मच गई। हालत बिगड़ने पर बिलासपुर, रायपुर और नागपुर मंडल के अधिकारियों को रेलवे केंद्रीय अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि जांच पूरी होने से पहले ही कई मरीजों को जल्दबाजी में छुट्टी दे दी गई।मामले की गंभीरता के बावजूद अस्पताल और प्रशासन पर चुप्पी का पहरा नजर आया। न तो मरीजों से मिलने की अनुमति दी गई और न ही मेडिकल स्टाफ को खुलकर बोलने दिया गया।

रेल प्रशासन ने औपचारिकता निभाते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम बनाने की घोषणा तो कर दी, लेकिन अब तक न होटल की जांच हुई, न भोजन सप्लाई चेन की और न ही कोई ठोस रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। पूरा घटनाक्रम यह संकेत देता है कि सच्चाई सामने लाने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश हो रही है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वरिष्ठ अधिकारी बीमार पड़ गए तो दबाव बनना स्वाभाविक है, लेकिन जोन के सीपीआरओ द्वारा फूड पॉयजनिंग से इनकार करना कई सवाल खड़े करता है। यदि यही भोजन आम यात्रियों को परोसा गया होता, तो क्या इतनी ही ढिलाई बरती जाती? क्या तब भी जांच से पहले लीपापोती होती? अब नजरें इस पर टिकी हैं कि रेलवे प्रशासन जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है या इस गंभीर लापरवाही को भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा।




