
गुरुवार को ट्रेडिंग यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आंशिक असर साउथ ईस्ट कोलफील्ड लिमिटेड की खदानों में भी देखने को मिला। हालांकि हड़ताल के बावजूद अधिकांश खदानों में उत्पादन और कार्य संचालन सामान्य बना रहा। SECL की कुल 20 ओपन माइंस में से अधिकांश में काम सुचारू रूप से चलता रहा, जबकि चार ओपन माइंस में हड़ताल का आंशिक असर दर्ज किया गया। वहीं पांच ओपन माइंस में काम पूरी तरह से प्रभावित रहा।कोरबा क्षेत्र के मेगामाइंस, दीपिका और कुष्मांडा परियोजनाओं में भी हड़ताल का आंशिक प्रभाव देखने को मिला। इसके अलावा भूमिगत खदानों की स्थिति पर नजर डालें तो SECL की कुल 35 अंडरग्राउंड माइंस में से ज्यादातर खदानों में काम बेहतर तरीके से संचालित हुआ, हालांकि कुछ खदानों में श्रमिकों की कमी के कारण आंशिक असर जरूर देखा गया।हड़ताल के चलते आवश्यक सेवाओं एसेंशियल सर्विस में लगे कर्मचारियों की भी उपस्थिति अपेक्षाकृत कम रही, जिसका असर कुछ स्थानों पर कार्य गति पर पड़ा। कुल मिलाकर देखा जाए तो SECL के अधिकांश क्षेत्रों में हड़ताल का व्यापक प्रभाव नहीं पड़ा, लेकिन ट्रेड यूनियनों द्वारा नए श्रम कानूनों के विरोध में किया गया यह आंदोलन सरकार के लिए एक संदेश जरूर है। यूनियनों का मानना है कि सरकार को नए श्रम कानूनों पर पुनर्विचार कर श्रमिक हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए।




