
व्यापार विहार स्थित ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल का विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने सीबीएसई बोर्ड के नाम पर बच्चों का एडमिशन लेकर मोटी फीस वसूली, लेकिन परीक्षा के समय अचानक यह कह दिया कि परीक्षा सीबीएसई नहीं बल्कि सीजी बोर्ड से होगी। इस खुलासे के बाद बच्चों के परिजनों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया और मामला हंगामे तक पहुंच गया। दरअसल परिजनों का आरोप है कि स्कूल ने शुरुआत से खुद को सीबीएसई से जुड़ा बताकर छोटे-छोटे बच्चों का एडमिशन लिया और अभिभावकों से भारी भरकम फीस भी वसूली। लेकिन जब परीक्षा का समय आया तो अचानक स्कूल प्रबंधन ने मैसेज जारी कर दिया कि अब बच्चों की परीक्षा सीजी बोर्ड के पैटर्न से कराई जाएगी। इस सूचना ने अभिभावकों के पैरों तले जमीन खिसका दी।पिछले तीन से चार दिनों से स्कूल के बाहर अभिभावकों का जमकर विरोध प्रदर्शन चल रहा है। परिजन लगातार स्कूल प्रबंधन पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ और धोखाधड़ी का आरोप लगा रहे हैं। आक्रोशित अभिभावकों ने कलेक्टर से मुलाकात कर स्कूल की मान्यता खत्म करने और सख्त कार्रवाई की मांग भी की है, जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।मामला शांत होने के बजाय और भड़क गया जब स्कूल प्रबंधन ने अचानक मैसेज भेजकर मंगलवार से अलग-अलग कक्षाओं की परीक्षा आयोजित करने की सूचना दे दी।

यह मैसेज मिलते ही अभिभावकों में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में परिजन स्कूल पहुंच गए। वहां मौजूद एक शिक्षक को घेरकर अभिभावकों ने जमकर हंगामा किया और स्कूल परिसर में भारी तनाव की स्थिति बन हंगामे की सूचना मिलते ही तारबहार और सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने की कोशिश की। लेकिन गुस्साए अभिभावकों का आक्रोश कम नहीं हुआ और मामला सिविल लाइन थाने तक जा पहुंचा, जहां भी परिजनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई। देर रात तक मामला शांत नहीं हुआ और आक्रोशित अभिभावक कलेक्टर बंगले के बाहर पहुंच गए। परिजनों का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों को सीबीएसई शिक्षा के लिए इस स्कूल में दाखिला दिलाया था, लेकिन अब अचानक सीजी बोर्ड की परीक्षा थोपना बच्चों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर स्कूल प्रबंधन पर धोखाधड़ी और जालसाजी की सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।




