गर्मी ने बढ़ाई मुश्किलें: बिलासपुर के ट्रैफिक सिग्नल पर लोगों की परेशानी….

बिलासपुर में गर्मी ने अपना असली रूप दिखाना शुरू कर दिया है। तपती दोपहर, चिलचिलाती धूप और आसमान से बरसती आग की लपटें आमजन के लिए बड़ी मुसीबत बन गई हैं। खासकर दोपहर 12 बजे से लेकर 3 बजे तक का समय लोगों के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। इसी बीच शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर लगे ट्रैफिक सिग्नल भी राहगीरों की परेशानी को और बढ़ा रहे हैं। डेढ़ से दो मिनट तक रेड लाइट पर खड़े रहना, वो भी बिना किसी छांव के, लोगों को बेहाल कर रहा है। दोपहर के समय हेलमेट पहने दोपहिया वाहन चालकों के चेहरे पर पसीने की धाराएं साफ नजर आती हैं। सायकल सवार तपती सड़कों पर खुद को ढकने की नाकाम कोशिश करते दिखाई देते हैं, जबकि ऑटो रिक्शा में बैठे यात्री भी गर्मी से छटपटाते नजर आते हैं। ऐसे में सिग्नल पर रुकना लोगों के लिए सिर्फ एक यातायात नियम नहीं, बल्कि एक बड़ी मानसिक और शारीरिक पीड़ा बन गया है। पिछले वर्ष जब स्थिति कुछ ऐसी ही बनी थी, तब प्रशासन ने दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक सभी ट्रैफिक सिग्नलों को अस्थायी रूप से बंद कर मैनुअल ट्रैफिक कंट्रोल शुरू किया था। इसका सीधा लाभ आम जनता को मिला था न रुकना पड़ा, न तपती धूप में ज्यादा देर खड़े रहना पड़ा। परंतु इस बार अब तक ऐसा कोई निर्णय सामने नहीं आया है, जिससे लोगों में नाराजगी और निराशा दोनों है। राहगीरों और शहरवासियों की मांग है कि इस बार भी प्रशासन को पिछली बार की तरह तत्काल निर्णय लेना चाहिए। उनका कहना है कि अगर ट्रैफिक सिग्नल पूरी तरह बंद नहीं किए जा सकते तो कम से कम उनके टाइमिंग को घटाकर 30 से 40 सेकंड तक कर दिया जाए। वर्तमान में अधिकांश सिग्नलों पर रेड लाइट का समय 100 सेकंड या उससे अधिक है, जो इस मौसम में अत्यधिक पीड़ादायक साबित हो रहा है। स्थानीय निवासियों का स्पष्ट कहना है गर्मी लगातार बढ़ रही है, और प्रशासन को इसके मद्देनजर ट्रैफिक व्यवस्था में संशोधन करना ही चाहिए। केवल नियम लागू करना पर्याप्त नहीं है, हालात को समझते हुए जनता को राहत देना भी प्रशासनिक जिम्मेदारी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बिलासपुर की ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन इस बार भी पिछली बार की तरह संवेदनशीलता दिखाएगा क्या दोपहर के इस भयानक तापमान में ट्रैफिक सिग्नलों को लेकर कोई राहत भरा निर्णय आएगा या फिर इस बार भी आमजन को तपते सूरज के नीचे, गर्म हवा के थपेड़े सहते हुए, लाल बत्ती पर खड़े रहना पड़ेगा। शहर की निगाहें अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। निर्णय जल्द आया तो राहत भी जल्द मिलेगी नहीं तो गर्मी की यह अग्निपरीक्षा और भी कड़ी हो जाएगी।

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