गैस किल्लत से होटलों में फिर जले चूल्हे, ढाबा संचालकों का देसी जुगाड़, कमर्शियल गैस की कमी से होटल व्यवसाय संकट में,चूल्हों पर बनने लगा खाना…गैस नहीं तो चूल्हा सही

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सात समंदर पार भारत के शहरों तक भी महसूस किया जाने लगा है। इसका सीधा असर बिलासपुर की रसोई पर दिखाई दे रहा है। कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत के कारण शहर के कई होटल और ढाबे संचालकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अपनी रोजी-रोटी बचाने के लिए होटल संचालकों को फिर से पारंपरिक चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा है।

जब हमारी टीम ने शहर के अलग-अलग होटलों और ढाबों का जायजा लिया, तो कई जगहों पर चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। शहर के प्रसिद्ध बल्ले बल्ले ढाबा, खालसा पराठा और न्यू गुप्ता होटल सहित कई ढाबों में गैस की जगह लकड़ी और कोयले से चूल्हे जलाकर खाना बनाया जा रहा है।होटल संचालकों का कहना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिल पा रहे हैं,

जिसके कारण होटल चलाना मुश्किल हो गया है। लेकिन होटल बंद करना भी संभव नहीं है, क्योंकि इससे उनकी रोजी-रोटी के साथ-साथ वहां काम करने वाले कर्मचारियों की आजीविका भी जुड़ी हुई है। यही वजह है कि उन्होंने मजबूरी में पुराने तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं।दिलचस्प बात यह है कि कई ढाबा संचालकों ने ड्रम काटकर देसी बर्नर जैसे चूल्हे तैयार कर लिए हैं।

कुछ जगहों पर इन चूल्हों में ब्लोअर या पंखे भी लगाए गए हैं, ताकि आग तेज जले और खाना जल्दी बन सके।हालांकि गैस की तुलना में इन चूल्हों पर खाना बनाने में ज्यादा समय लगता है, लेकिन फिलहाल यही जुगाड़ होटल और ढाबा संचालकों के लिए सहारा बन गया है।

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