*जादूगर के पास तथाकथित वीआईपी मानवाधिकार नामक एनजीओ के मेंबर पास मांगने पहुंच रहे।*  *शो से देश के अनेकों पत्रकार वकील जुड़े हुए हैं और सामाजिक सन्देश देते है.*

जादूगर के पास तथाकथित वीआईपी मानवाधिकार नामक एनजीओ के मेंबर पास मांगने पहुंच रहे। शो से देश के अनेकों पत्रकार वकील जुड़े हुए हैं और सामाजिक सन्देश देते है.

कोरबा । दर बदर भटक रहें भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को संभाले कलाकारो को भी कभी ये संस्था या नेतागिरी या मानवाधिकार के धौंस का सामना अब आम बात सी है। जैसा जादूगर अजूबा को कोरबा में महसूस हो रहा है। कोई फ्रंट सीट के लिए जमी आसमा एक करता तो कोई हजारों की सैलरी कमाने वाला पास पाना अपनी प्रतिष्ठा का इश्यू बना लेता। शो के महाप्रबंधक के नंबर हर आधिकारिक विभाग में पहले से ही होते हैं क्योंकि परमिशन के पश्चात कार्यकर्म शुरू होते हैं। लेकिन तब भी हम यहां सेआदि झेलने होते हैं शो प्रबंधन को। शो के महाप्रबंधक के सरल जवाब होते हैं कि आप कोई भी हो जहां की सीट ली हो आप वही बैठेंगे। ऑनलाइन टिकट सिस्टम है।फ्री मुश्किल है। दुबारा वो वीआईपी? दूसरा दाव चलता,, क्या!?
हम कांग्रेस या किसी पार्टी के वरिष्ठ नेता है, मानवाधिकार संस्था से भी हूं, प्रेस से भी हू आदि आदि?????abcd शब्द।। तुम पास नही दोगे तो कलेक्टर साहब से बात करता हूं। मुझे आज तक कोई पास के लिए कोई मना नही किया। मानवाधिकार संस्था से भी हू या कुछ और ऐसे ही शब्द परिचय!!
हमारा सीधा जवाब चाय पीना है तो पैसे देकर ही चाय पीजिए या हम होस्ट है आप मेरे मेहमान है तो हम वो खुद होस्ट की भूमिका का पालन करेंगे। अतिथि देव तुल्य होते हैं उन्हें हम हाथ जोड़ कर बुलाते है।
आज कलाकारो को हॉल किराया और स्टाफ के खर्चे तक निकलना मुश्किल हो रहा है।ट्रक भाड़ा हॉल किराया कुर्सी टेंट हाउस के किराए के होते हैं ।ये शो कोई अनपढ़ लोगो का नही हैं, देश के वरिष्ठ पत्रकार हीएडवोकेट सब इस से जुड़े हैं . उल्लेखनीय है कि जब देश में किसी चिड़िया या पशु की संख्या कम होने लगती है तो देश के बुद्धिजीवी और सरकार सक्रिय हो जाती है, सैकड़ों करोड़ का प्रस्ताव पारित होते हैं लेकिन भारत की अनुपम सांस्कृतिक विरासत जादू कला आज कब्र में जाने की दिशा में है और विडंबना देखिए कही कोई आवाज नहीं? उल्टे अनेक प्रेशर.हम अनेक सामाजिक सन्देश देते हैं शो में बिना कोई सरकारी सुविधा या धनराशि लिए .मानवाधिकार क्राइम प्रभावित करने वाले नाम से एनजीओ पंजीकृत करा ये लोग यही सब करते हैं क्या?? ऐसे नामो का दुरुपयोग हो रहा।न एनजीओ बनाते है, अनेक फ्रॉड हो रहे ठीक उसी प्रकार जैसा प्रैस कार्ड आईडी सेल का होते हैं जांच होनी चाहिए

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