
हर घर पानी पहुंचाने के उद्देश्य से शासन के द्वारा अमृत मिशन योजना प्रारंभ की गई है जो अब शहरों से निकलकर ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच चुका है लेकिन इन क्षेत्रों में कार्य में हो रही लापरवाही की वजह से आने वाले समय में क्षेत्र की जनता भारी परेशान होने वाली है।तय मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है जिसकी वजह से भविष्य में समस्या होगी। सरकार के बड़े-बड़े दावों के बीच, अमृत मिशन 2.0 का सपना तखतपुर में कीचड़ में बदलता दिख रहा है। यहाँ पाइप बिछाने से पहले जो ज़रूरी बेस होता है—जैसे रेत, मुरूम या बजरी—उसे दरकिनार कर दिया गया है ।रायपुर स्थित शुडा कार्यालय के अधिकारी का कहना हैं कि पाइप के नीचे सही बेस होना अनिवार्य है। लेकिन तखतपुर में तो पाइप सीधे गंदे पानी में डालकर, मिट्टी में दबा दिया जा रहा हैं। यदि पाइप लाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है तो 1 मीटर गड्ढा करना अनिवार्य है और गड्ढा करने के बाद पाइप बिछाने से पहले बेस के तौर पर मुरूम डालना अनिवार्य है

ताकि पाइप दबे ना लेकिन तखतपुर में पैसा बचाने के चक्कर में ठेकेदार सहित जिम्मेदार कर्मचारी भारी लापरवाही कर रहे हैं जिसका खामियाजा भविष्य में तखतपुर की जनता भुगतेगी ।इस संबंध में जब बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल से बात की तो उनके द्वारा समस्या की जांच कराने की बात कही गई। तखतपुर नगरपालिका सीएमओ की कार्यशैली भी प्रश्न चिन्ह के दायरे में आती है ठेकेदार द्वारा ऐसी लापरवाही रुक नहीं रही है यह न केवल निर्माण मानकों की अनदेखी है, बल्कि जनता की सुविधा और पैसे की भी बर्बादी है। तखतपुर के इस अनियमितता से यह साफ़ होता है कि ठेकेदार को नियमों की कोई परवाह नहीं है, और जनता की उम्मीदों को भी ताक पर रखा गया है।अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर कोई ठोस कदम उठाएगा, या फिर यह योजना भी सिर्फ कागज़ों में ही सफल मानी जाएगी?तखतपुर से विनय करिहार की रिपोर्ट




