
रेलवे प्रशासन की लापरवाही और अव्यवस्थाओं की एक और तस्वीर सामने आई है। इस बार मामला है दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नए महाप्रबंधक तरुण प्रकाश के स्वागत का। लेकिन इस भव्य आयोजन के पीछे की सच्चाई क्या है? आइए जानते हैं
“ये तस्वीरें हैं बिलासपुर के उसलापुर रेलवे स्टेशन की, जहां आज नए महाप्रबंधक तरुण प्रकाश का स्वागत किया गया। भव्य स्वागत समारोह, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और बड़े अधिकारियों की मौजूदगी… लेकिन इसका खामियाजा भुगतना पड़ा आम यात्रियों को।”
उसलापुर रेलवे स्टेशन पर, जहां आज का दिन आम यात्रियों के लिए किसी मुश्किल परीक्षा से कम नहीं था। स्वागत की भव्यता ने यात्रियों के लिए सुविधाओं का गला घोंट दिया।”

“स्टेशन के मुख्य गेट को बंद कर दिया गया, और यात्रियों को अस्थायी गेट से गुजरने के लिए मजबूर किया गया। लेकिन जैसे ही जीएम का काफिला पहुंचा, यह गेट भी बंद कर दिया गया। नतीजा? घंटों इंतजार और भारी असुविधा।”
यात्रियों ने कहा हमने टिकट लिया है, लेकिन अंदर जाने का कोई रास्ता नहीं था। सुरक्षा कर्मियों ने हमें वापस भेज दिया। क्या रेलवे यात्रियों के लिए है या सिर्फ अधिकारियों के लिए?
“यात्रियों ने कहा हम अपने परिवार को लेने आया था, लेकिन सड़क पर ट्रैफिक रोक दिया गया। पार्किंग में भी जगह नहीं थी। ये किसी यात्री की सुविधा का ध्यान रखने का तरीका है?”
“इतना ही नहीं, स्टेशन के बाहर भी यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, और अपने प्रियजनों को लेने आए लोग बेहाल हो गए।

“प्रशासन का ध्यान सिर्फ महाप्रबंधक के स्वागत पर था। यात्रियों की परेशानियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। न तो कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई और न ही यात्रियों को पहले से सूचना दी गई।
“रेलवे अधिकारियों ने इस अव्यवस्था पर सफाई देते हुए कहा कि यह अस्थायी असुविधा थी। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या किसी भी भव्य आयोजन की कीमत आम जनता को भुगतनी चाहिए?
तो यह थी उसलापुर स्टेशन की हकीकत, जहां एक भव्य स्वागत समारोह ने यात्रियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं। क्या ऐसे आयोजनों में आम जनता की सुविधा का ख्याल रखना प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है? या रेलवे का काम सिर्फ अधिकारियों को खुश करना रह गया है? आपकी क्या राय है? हमें बताइए।




