नहाए-खाए के साथ छठ महापर्व का शुभारंभ, व्रतियों ने किया सात्विक भोजन का प्रसाद ग्रहण

नहाए खाए एक पारंपरिक पर्व है, जो भारत के कई हिस्सों में मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में मनाया जाता है। नहाए खाए का अर्थ है “नहाने के बाद खाना”। यह पर्व कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है।नहाए खाए का पर्व वास्तव में एक पारंपरिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। छठ पर्व पर छठी मैया और सूर्य देव की उपासना की जाती है, जिसमें शुद्धता का बहुत अधिक ख्याल रखा जाता है।

पर्व के प्रथम दिन भी इसी शुद्धता को महत्व देते हुए नहाने के पश्चात पूजा अर्चना कर गृहणियों ने सात्विक भोजन तैयार किया। मंगलवार से चार दिवसीय छठ पूजा महोत्सव का आरंभ हो गया। इसकी शुरुआत नहाए खाए से हुई। इस व्रत में स्वच्छता का विशेष महत्व है। इस दिन व्रती महिलाएं पहले नहाती है, उसके बाद पूजा अर्चना कर सात्विक भोजन बनाती है। भोजन में चावल, चने की दाल , लौकी या कद्दू की सब्जी , आंवले की चटनी और पकौड़े बनाने की परंपरा है। यह भोजन शुद्ध, सात्विक और पवित्र माना जाता है।

इस दिन नमक वाला भोजन केवल एक ही बार किया जाता है। नहाने के बाद ही भोजन पकाया जाता है इसलिए इसे नहाए खाए कहते हैं । कामकाज और अन्य कर्म से अन्य शहरों में रहने वाले घर के सदस्य छठ के लिए घर लौट आए हैं ।महिलाएं पूरी शुद्धता के साथ छठ गीत गाते हुए सात्विक भोजन बना रही है। इसी तरह से अगले दिन खरना का प्रसाद तैयार किया जाएगा । इसे लेकर व्रती परिवारों में अपार उत्साह नजर आ रहा है।

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