
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड की बड़ी लापरवाही के चलते बिलासपुर नगर निगम पर 52.73 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया था, जिसे समय रहते पकड़ लिया गया। जांच में सामने आया कि विभाग ने 437 बिजली कनेक्शनों के आधार पर बकाया तैयार किया था, जिनमें से 397 कनेक्शनों की बिलिंग पूरी तरह गलत पाई गई।मामले में संदेह होने पर राज्य शहरी विकास अभिकरण ने जांच कराई, जिसके बाद सीएसपीडीसीएल के अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया। जांच में खुलासा हुआ कि कई बंद पड़े कनेक्शनों, यहां तक कि निष्क्रिय बोर और एकलबत्ती कनेक्शनों पर भी लगातार बिल जारी किए जा रहे थे।पहले नगर निगम के जल प्रदाय और स्ट्रीट लाइट के 562 कनेक्शनों पर जनवरी 2026 तक कुल बकाया 191.62 करोड़ रुपए दर्शाया गया था। लेकिन गड़बड़ी उजागर होने के बाद बिजली कंपनी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए 52.73 करोड़ रुपए का समायोजन किया, जिससे बकाया घटकर 138.89 करोड़ रुपए रह गया।हालांकि निगम को आंशिक राहत मिली है, लेकिन अब भी 138 करोड़ रुपए का भुगतान करना बड़ी चुनौती बना हुआ है। नगर निगम के बिजली विभाग चेयरमैन विजय ताम्रकार के अनुसार, एनर्जी ऑडिट में यह गड़बड़ी सामने आई और बंद कनेक्शनों पर भी बिलिंग की जा रही थी।इस पूरे मामले ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और ऑडिट सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह जांच का विषय है कि इतनी बड़ी त्रुटि लंबे समय तक कैसे नजरअंदाज होती रही।


