अब तो यह स्पष्ट हो चुका है कि बिलासपुर अवैध धर्मांतरण करने वालों का गढ़ बन चुका है । एक के बाद एक कार्यवाही में यहां इस तरह के मामले उजागर हो रहे हैं। रविवार को भी सरकंडा क्षेत्र में हिंदू टास्क फोर्स ने छापेमारी कर अवैध धर्मांतरण का खुलासा किया। चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के लिए धर्मांतरण का मामला बेहद अहम था। इसे ही चुनाव के दौरान मुख्य मुद्दा बनाया गया लेकिन लगता है चुनाव समाप्त होते ही भारतीय जनता पार्टी के लिए मामला महत्वपूर्ण नहीं रह गया है। पूरे प्रदेश में अवैध धर्मांतरण जारी है। बिलासपुर तो अब ऐसे ही मिशनरी के निशाने पर है। दावा किया जा रहा है कि केवल बिलासपुर में ही 100 से अधिक स्थानों पर सप्ताह में तीन बार प्रार्थना सभा या चंगाई सभा का आयोजन कर भोले भाले लोगों का ब्रेनवाश कर उन्हें ईसाई बनाने की साजिश रची जा रही है। सेवा, शिक्षा स्वास्थ्य तो कभी भय दिखाकर लोगों को ईसाई बनाने की साजिश रची जा रही है। बाहर से आकर पास्टर, पादरी और धर्म प्रचारक लोगों का मतांतरण कर रहे हैं। पिछले दिनों इसे लेकर गृह मंत्री ने कड़ा रुख अपनाने की बात कही जरूर थी लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई खास कार्यवाही न होने से ऐसे तत्वों के हौसले बुलंद है। सरकंडा क्षेत्र में भी 40 से अधिक जगह पर इस तरह सभा होने की खबर है, जिसे लेकर हिंदू संगठनों ने हिंदू टास्क फोर्स का निर्माण किया है जिन्होंने रविवार सरकंडा क्षेत्र के लिंगियाडीह खूंटी पारा में ऐसे ही दो सभाओं का भंडाफोड़ किया, जहां लोगों को बुलाकर प्रार्थना सभा में हिंदुओं को बाइबल बांटी जा रही थी। उन्हें पैसों का लालच देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। किसी के अस्वस्थ होने पर उन्हें यह दिलासा दिया जा रहा था कि वे ईसाई बनते ही स्वस्थ हो जाएंगे। विशेष बात यह है कि मिशनरी से जुड़े लोग गरीब अशिक्षित भोले भाले ग्रामीणों को ही निशाना बना रहे हैं। उनके निशाने पर पढ़ा लिखा शिक्षित और समृद्ध हिंदू समाज नहीं है, क्योंकि उन्हें बहकाना आसान नहीं है। ठाकुर राम सिंह ने बताया कि अवैध धर्मांतरण कर देश को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। लोगों को लालच देकर बड़े पैमाने पर धर्मांतरण किया जा रहा है। पुलिस चाहती तो इन्हें रोक सकती थी लेकिन यह काम अब हिंदू संगठनों को ही आगे जाकर करना पड़ रहा है। एक के बाद एक हो रहे खुलासे बता रहे हैं की स्थिति कितनी भयावह है। लगातार इस तरह के मामले उजागर हो रहे हैं। कई बार लिंगियाडीह खुटी पारा में चार जगह पर इसी तरह अवैध धर्मांतरण का खेल खेला जा रहा था। हिंदू संगठनों से जुड़े लोग मौके पर पहुंचे तो पाया कि मोपका क्षेत्र के दो घरों में प्रार्थना सभा के जरिए ईसाई धर्म का प्रचार कर हिंदुओं को धर्मांतरण करने का प्रयास हो रहा था। इन लोगों को बाइबल और ईसाई धर्म से जुड़ा साहित्य दिया गया था। इस मामले में पुलिस ने शिकायत के बाद चार लोगों को हिरासत में लिया है। यह कोई पहला मामला नहीं है जब इस तरह की शिकायत सामने आई है। कोनी थाना क्षेत्र के रमतला में भी इस तरह की शिकायत सामने आई थी। मस्तूरी, राजेंद्र नगर और कोनी क्षेत्र में प्रार्थना सभा के बहाने धर्मांतरण कराने के मामले में सात लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। ऐसे तत्वों का साथ देने के इल्जाम में कोनी टीआई सस्पेंड भी हो गए। लेकिन ना तो इससे पुलिस चौकन्नी हुई और ना ही धर्मांतरण की साजिश में लगे लोगों पर ही कोई असर पड़ा। हालत यह है कि जब हिंदू संगठन से जुड़े लोग अवैध धर्मांतरण रोकने पहुंचते हैं तो यह लोग उनसे ही भिड़ जाते हैं। दुख का विषय तो यह है जिनके खिलाफ यह साजिश रची जा रही है , इनके द्वारा उनका भी इस कदर ब्रेनवॉश किया जा चुका है कि वे भी हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों से मारपीट पर उतारू हो जाते हैं, जबकि ऐसे लोग उन्हें बचाने पहुंचते हैं। सोचिए जब शहर में हालात इस कदर है तो फिर अंदाज लगाया जा सकता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में क्या स्थिति होगी। दिलीप सिंह जूदेव के जमाने में ऑपरेशन घर वापसी किया गया, जिसका अभी कहीं अता पता नहीं है। हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर सरकार इसे लेकर सख्त कानून बनाए और अवैध धर्मांतरण को रोके तो फिर घर वापसी की आवश्यकता ही नहीं होगी। लगता है मिशनरी के निशाने पर पूरा छत्तीसगढ़ है। इस तरह के मामले बताते हैं कि यहां किस पैमाने पर अवैध धर्मांतरण का खेल खेला जा रहा है, लेकिन उस तुलना में कार्यवाही ना के बराबर है। वैसे इसे रोकने की जिम्मेदारी केवल चंद जागरूक युवाओं की ही नहीं है। यह जिम्मेदारी हर हिंदू और पुलिस एवं प्रशासन से जुड़े लोगों की भी है, जिन्हें आगे आकर इसे रोकना होगा।




