बिलासपुर: 100 साल पुराने हनुमान मंदिर पर कब्जे का विवाद, जीर्णोद्धार की मांग तेज

बिलासपुर के गोल बाजार से गुजरने वाले बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी होगी कि इसी स्थान पर शिमला बूट हाउस और फुटपाथ पर लगने वाले अन्य दुकानों के पीछे 100 साल प्राचीन दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर भी मौजूद है। इस मंदिर को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा रहा है। बताया जा रहा है कि मंदिर नगर निगम की संपत्ति है। मंदिर में पूजा पाठ करने के लिए पुजारी नागेश तिवारी को रखा गया था। जिनकी मृत्यु के पश्चात उनके पुत्र सुरेश तिवारी ने मंदिर पर कब्जा जमा लिया है। सुरेश तिवारी नगर निगम का कर्मचारी है, इसलिए वह लोगों पर अपने पद का धौंस दिखाकर मंदिर को हमेशा बंद रखता है।

इतना ही नहीं मंदिर के आसपास की जमीन पर उसने फुटपाथ पर कई लोगों को किराए पर दुकान उपलब्ध कराया है, जिससे वह ₹40,000 महीना किराया लेता है। यहीं शिमला बूट हाउस है जिसका गोदाम मंदिर परिसर में है। मंदिर में जुते चप्पल रखने की भी शिकायत की गई है, जिससे लोगों की भावनाएं आहत हो रही है। इधर 100 साल पुराने मंदिर के कपाट हमेशा बंद रहने से ना तो भगवान की नियमित पूजा अर्चना हो पा रही है और इससे भक्तों की भावनाएं भी आहत हो रही है। सिंधी कॉलोनी में रहने वाले विकास टेकचंदानी ने कलेक्टर को पत्र लिखकर इस 100 साल पुराने जर्जर मंदिर के जीर्णोद्धार की मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति से लोगों की भावनाएं आहत हो रही है । इस 100 साल पुराने दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर की स्थिति बेहद जर्जर है । मंदिर के सामने की जमीन पर बेजा कब्जा हो चुका है ।

मंदिर नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है, जहां जगह-जगह नशीले इंजेक्शन और अन्य सामग्री बिखरे पड़े हैं। मंदिर के दरवाजे हमेशा बंद रहने से श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए भी नहीं आ पाते। इधर बताया जा रहा है कि मंदिर पर कब्जा जमा चुके सुरेश तिवारी हर महीने ₹40,000 किराया वसूल रहे हैं, इसलिए प्रशासन के दखल की मांग की गई है ताकि मंदिर का जीर्णोद्धार हो सके। इधर मंदिर के आसपास दुकान लगाने वालों ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि विकास टेकचंदानी को किराए में दुकान नहीं मिला, इसलिए वह इस तरह की शिकायत कर रहा है। ऐसा कहने वालों का दावा है कि पिछले दिनों हुए विवाद के बाद अदालत ने भी सुरेश तिवारी के पक्ष में ही फैसला सुनाया था।

वे इस मंदिर को सुरेश तिवारी की निजी संपत्ति बता रहे हैं। मामले की सच्चाई क्या है यह जांच से ही स्पष्ट हो पाएगी। इधर हिंदू संगठनों ने भी प्राचीन मंदिर में व्याप्त गतिविधियों पर आपत्ति जताते हुए शाशन द्वारा इसे अधिग्रहित कर इसके जीर्णोद्धार की मांग की है, ताकि हनुमान जी की नियमित पूजा अर्चना हो सके।

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