मजदूर की बेटी का हुआ कॉमनवेल्थ तलवारबाजी चैंपियनशिप के लिए चयन, मगर न्यूजीलैंड जाने के लिए नहीं है पैसे, लगाई गुहार।

चिंगराजापारा के छोटे से घर या उसे झोपड़ी कहें तो बेहतर होगा, इससे निकल मजदूर की बेटी रुपाली साहू अब न्यूजीलैंड के क्राइस्ट चर्च में अपना जौहर दिखाएंगी। तलवारबाजी खिलाड़ी रूपाली साहू का चयन कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप के लिए किया गया है। यह प्रतियोगिता 12 से 19 जुलाई 2024 तक होगी।
खिलाड़ी ने बताया कि उसका का चयन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता एवं गोवा में आयोजित हुए 37 वें राष्ट्रीय खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर किया गया है। अब उसे कॉमनवेल्थ गेम के लिए न्यूज़ीलैंड जाना है, समस्या आने जाने रहने सहित खर्च की है रूपाली बताती है कि वहां उसे साढ़े 3 से 4 लाख खर्च होगा, जबकि उसके पिताजी एक मिस्त्री है। इतना पैसा वह कहां से लाएगी। इस बात की चिंता है। जबकि खेल संघ प्रशासन से उसे कोई मदद नहीं मिली है, उसे उम्मीद है कि कहीं से उसे सहयोग मिल जाए तो वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर सकेगी।

इसी वर्ष जीवविज्ञान से बारहवी पास रुपाली ने बताया नेशनल खेलने जा रहीं थी तो उसके बाद बेहतर तलवार नहीं थीं। कोच ने उन्हें अपनी तलवार दी और उससे खेलकर उन्होंने सिल्वर मैडल प्राप्त किया। रुपाली बताती है कि तलवारबाजी के इक्यूमेंट काफी महंगे आते हैं इसलिए कई बार परेशानी हुई लेकिन सबसे कम कीमत की जो तलवार और दूसरे सामान आते हैं उसे खरीदकर मैदान में उतरती थी। उसके पिता का कहना है कि अब तक तो यहां तक पहुंच गई है। अब अंतरराष्ट्रीय खेल के लिए पैसे की चिंता सता रही है ।

गौरतलब हैं कि दूसरे बाहरी राज्यों के खिलाड़ियों के पास बेहतर सामान और सुविधाएं होतीं थीं लेकिन रुपाली के पास हौसला और जूनून था। इसी के सहारे उसने महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा और दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों को मात दी। रुपाली के कोच के मुताबिक तलवारबाजी संघ, खेल संघ से एफिलेटेड तो है लेकिन उसके बाद भी खिलाड़ियों को कॉमनवेल्थ तलवारबाजी चैंपियनशिप के लिए पूरा खर्चा खुद ही उठाना होगा। इसमें साढ़े तीन लाख का खर्चा होगा।फिर भी सीखने वाली बात है कि तमाम अभावों को दूर करते हुए रुपाली साहू ने यह बता दिया है कि मन से ठान लिया जाए तो कुछ भी असंभव नहीं है। अब रुपाली के सामने परेशानी साढ़े तीन लाख रुपए को लेकर है, जो कि कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में लगेगा। इसमें वीजा से लेकर आने जाने और दूसरे खर्चे शामिल हैं। अब देखना होगा कि इस बेटी के कदम इस आर्थिक परेशानियों के कारण रुक तो नहीं जाएंगे या शासन प्रशासन या जनसहयोग से उसे अपने प्रतिभा विदेशों में दिखाने का अवसर प्राप्त होगा।

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