रायपुर : बाल श्रम के विरुद्ध कड़ा एक्शन: डॉ. वर्णिका शर्मा ने दिए प्रदेशव्यापी छापेमारी अभियान के निर्देश

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की नव नियुक्त अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने कार्यभार ग्रहण के दूसरे ही दिन बाल श्रम की रोकथाम को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेशभर में व्यापक छापेमारी अभियान के निर्देश जारी किए हैं।डॉ. शर्मा ने श्रम विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, सभी जिलों के कलेक्टर्स एवं पुलिस अधीक्षकों को आठ बिंदुओं पर आधारित सुनियोजित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल श्रम का उन्मूलन एक दिवस की प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सतत अभियान है, जिसे निरंतरता से संचालित किया जाना चाहिए।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के बाल अधिकारों की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध दृष्टिकोण के अनुरूप, यह पहल राज्य में बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में निर्णायक कदम के रूप में देखी जा रही है।डॉ. शर्मा ने निर्देश दिए हैं कि अप्रैल 2025 से प्रारंभ होकर प्रत्येक तीन माह में सात दिवसीय प्रदेशव्यापी छापामारी अभियान चलाया जाए। इस कार्यवाही में जिला बाल संरक्षण इकाई, पुलिस प्रशासन और संबंधित थाना क्षेत्रों की भागीदारी से विशेष दलों का गठन किया जाएगा।

अभियान के दौरान पाए गए बाल श्रमिकों को तत्काल आवश्यकतानुसार बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।उन्होंने यह भी कहा कि इन कार्यवाहियों के दौरान राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जारी मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) का पूरी तरह पालन किया जाए। अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम प्रतिषेध दिवस (12 जून 2025) को सार्थक बनाते हुए, प्रत्येक जिले में जिला कलेक्टर के समक्ष श्रम विभाग द्वारा बाल श्रम की स्थिति पर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

आम नागरिकों की सहभागिता को बढ़ाने के लिए, डॉ. शर्मा ने श्रम विभाग के अंतर्गत टोल फ्री नंबर की स्थापना और उसके सक्रिय संचालन की अनुशंसा की है, जिससे बाल श्रम संबंधी सूचनाएं त्वरित रूप से प्राप्त की जा सकें।बाल श्रम के मूल कारणों को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने यह भी निर्देशित किया है कि बचाए गए बालकों के परिवारों को तत्काल रोजगार उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए जिला कलेक्टोरेट स्तर पर ‘एकल खिड़की व्यवस्था’ स्थापित करने की सिफारिश की गई है, जिससे प्रभावित परिवारों को समुचित और त्वरित सहायता दी जा सके।डॉ. शर्मा के यह निर्देश मुख्यमंत्री श्री साय एवं मंत्री श्रीमती राजवाड़े की मंशा के अनुरूप बाल अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक प्रभावी और दूरदर्शी कदम माने जा रहे हैं।

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