विपक्ष का पिछड़ा विरोधी चेहरा उजागर, पूर्व सांसद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि किस तरह से तमिलनाडु के बाद बंगाल में भी किया गया तुष्टीकरण।

इंडी गठबंधन का एक और कारनामा सामने आया है, पश्चिम बंगाल में ममता सरकार द्वारा जारी किया गया जाति प्रमाण पत्र पर हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए 2010 के बाद जारी ओबीसी जाति प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया है, इस विषय को लेकर भाजपा कार्यालय में पूर्व लोकसभा सांसद लखन साहू ने पत्रकारों से चर्चा की। चर्चा के दौरान बताया कि कोलकाता हाई कोर्ट के फैसला के बाद इंडि गठबंधन का अराजकता वाला चेहरा सामने आ गया है। बताया गया कि पश्चिम बंगाल में 179 जातियां अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल थी, ममता बनर्जी की सरकार ने 118 मुस्लिम समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल कर दिया। बिना जांच बिना सर्वे के शामिल जातियों को हाई कोर्ट में चैलेंज किया गया, मामले को सुनने के बाद कोलकाता हाई कोर्ट ने 2010 के बाद जारी सभी अन्य पिछड़ा वर्ग की जातियों को रद्द कर दिया है।

वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी ने संविधान संवाद सम्मेलन में स्वीकार किया है कि लंबे समय से देश में कांग्रेस की सत्ता रही है इस दौरान आदिवासी पिछड़े वर्ग दलित वर्गों का उत्थान और विकास नहीं हुआ है, इन तमाम बातों को देखकर इंडि गठबंधन की अराजकता वाली बात सामने आई है, इसे लेकर भारतीय जनता पार्टी इसका विरोध करती है, जबकि भाजपा सरकार हमेशा से दलित पिछड़े वर्ग आदिवासियों की हितेषी रही है उनके अधिकारों की रक्षा की है जबकि हिंदी गठबंधन के घटक दलों ने इसका विकास रोक है और रोहिंग्या मुसलमान को देश मे पनाह दी है, जिससे देश का माहौल बिगड़ा है।

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