स्टेशन संवारने की होड़ में पटरी से उतरी रेल सेवा, यात्रियों पर पड़ा ‘आधुनिकीकरण’ का भार काम के नाम पर ट्रेनों की झड़ी से रद्दी, बिलासपुर समेत प्रदेश भर के यात्री बेहाल

रेलवे विकास के नाम पर आम यात्रियों की यात्रा पर ब्रेक लगा रहा है। एक तरफ स्टेशनों को चमकाने की तैयारी है, तो दूसरी ओर ट्रेनों की बड़ी संख्या में रद्दी और देरी ने यात्रियों को बेहाल कर दिया है। अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत देशभर के स्टेशनों को हाईटेक और खूबसूरत बनाने की कवायद तो तेज़ है, लेकिन इससे यात्रियों को कोई राहत नहीं मिल रही। दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में झारसुगुड़ा यार्ड के आधुनिकीकरण के नाम पर अगस्त और सितंबर के बीच कई ट्रेनों को रद्द, डायवर्ट और आंशिक रूप से रद्द कर दिया गया है।16 अगस्त से 10 सितंबर तक चलने वाले इस कार्य के चलते बिहार, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे राज्यों से जुड़ी लंबी दूरी की महत्वपूर्ण ट्रेनें या तो पूरी तरह बंद रहेंगी या बीच रास्ते से लौटा दी जाएंगी। कुछ ट्रेनों को दूसरे मार्गों से चलाया जाएगा, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त सफर करना पड़ेगा।यात्रियों का आरोप है कि रेलवे आधुनिकीकरण की आड़ में आम जनता की असुविधा को नजरअंदाज कर रहा है। अधिकांश लोगों ने पहले से टिकट बुक कर रखे थे, लेकिन आखिरी वक्त में ट्रेनों के रद्द होने की सूचना ने उनकी योजना बिगाड़ दी।कई ट्रेनें राउरकेला तक सीमित कर दी गई हैं और कई 3 से 6 घंटे की देरी से चलेंगी। इससे यात्रियों की फ्लाइट, नौकरी और मेडिकल से जुड़ी योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। खासकर मध्यम वर्ग और छात्र वर्ग सबसे अधिक संकट में है।लोगों का कहना है कि अगर हर महीने किसी न किसी काम के बहाने ट्रेनों को रोका जाएगा तो यह यात्री सुविधा नहीं, यात्री सज़ा बनती जा रही है। तकनीकी कारण, मरम्मत और अब नॉन-इंटरलॉकिंग हर बार नई वजह और हर बार नई परेशानी। रेलवे को ये समझना होगा कि असली विकास यात्रियों की सुविधा से जुड़ा है, न कि सिर्फ स्टेशन की चमक-दमक से। अगर ट्रेनें ही नहीं चलेंगी, तो भव्य स्टेशन भी बेकार हैं। यात्रियों को भरोसा चाहिए, रद्दी नहीं। वरना ये विकास, आम जनता के लिए परेशानी बन जाएगा।

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