134वीं जयंती पर चकरभाठा की सड़कों पर उतरा नीला सैलाब,,बाबा साहब के विचारों से गूंज उठा नगर

चकरभाठा में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की 134वीं जयंती बड़े ही हर्षोल्लास, बाजे-गाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ मनाई गई। इस ऐतिहासिक आयोजन में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसमें महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक रही।

रैली की शुरुआत वॉलीबॉल ग्राउंड से हुई, जो बोदरी स्थित बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ आगे बढ़ी। वापसी मार्ग में यह रैली उच्च न्यायालय के सामने से होते हुए नयापारा रोड, संत गाडगे जी महाराज चौक से गुजरती हुई चकरभाठा मार्केट की प्रमुख सड़कों पर निकाली गई, जहां जगह-जगह इसका भव्य स्वागत किया गया।

बोदरी के अंबेडकरवादी युवा राजा वर्मा जी और उनके साथियों ने रैली का स्वागत ढोल-ताशे, फटाखों की लड़ियों और जलपान की व्यवस्था के साथ किया। पूरे चकरभाठा मार्केट में रैली का स्वागत बेहद जोशीले अंदाज में हुआ।

मुख्य वक्ता के रूप में आयुष्मान डॉ. संतोष साहू, आयुष्मान प्रदीप बंजारे और लोकेश पूजा बौद्ध जी ने बाबा साहब के जीवन संघर्षों पर प्रकाश डाला और शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “एक रोटी कम खाओ, पर बच्चों को जरूर पढ़ाओ।” बाबा साहब को उद्धृत करते हुए यह भी कहा गया, “शिक्षा शेरनी का दूध है, जो इसे पियेगा वह दहाड़ेगा।

“कार्यक्रम का शुभारंभ बाबा साहब के चित्र पर पुष्पांजलि, मोमबत्ती प्रज्वलन और त्रिशरण व पंचशील वाचन से हुआ। बुद्ध और धम्म गीतों पर बच्चों द्वारा प्रस्तुतियां दी गईं, जिसे आयुष्मान सतीश रात्रे के मार्गदर्शन में तैयार किया गया था। प्रस्तुति देने वाले बच्चों को मेडल पहनाकर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

मुख्य अतिथियों का स्वागत नीले मफलर और मोमेंटो देकर किया गया। मंच संचालन का जिम्मा आयुष्मान बसंत बौद्ध (भारतीय बौद्ध महासभा, चकरभाठा अध्यक्ष) ने बखूबी निभाया। अंत में सतनाम संगठन बोदरी के आयुष्मान इंदल ओगरे ने आए हुए अतिथियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विजय पाटिल, उधो नायक, उमेश ओमकार, प्रफुल्ल नायक, निलेश नायक, लक्ष्मीनारायण नायक, मनोहर पाटिल, विजय नायक, कुलदीप पाटिल, कमलेश लावहात्रे, रामनारायण लहरी, के.आर. पैगवार, देवेंद्र ऑग्रे, राजेश हुमने, महेश चंद्रिकापूरे, सारंग राव हुमने, नितेश अंबादे, देवेंद्र मोटघरे, कुणाल रामटेके, मुकेश गोंडने, राजेश रामटेके, शीतल रामटेके, सुरेश दिवाकर, राधेश्याम टंडन, चुन्नीलाल सिन्हा, राजेंद्र कौशिक, दीक्षा बौद्ध, सुनीता बौद्ध, लवली बौद्ध, प्रथा बौद्ध, शशि नायक, शीला नायक, आस्था नायक, अरहत बौद्ध, दुर्गा नायक, प्रिया टैंगवार, वंशिका नायक, प्रज्ञा नायक, शंकर पठारी, मनोज बौद्ध, विनोद बौद्ध, अशोक रात्रे, दिलीप मेश्राम समेत अनेक अंबेडकरवादी साथियों का विशेष योगदान रहा।

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