न्यायालय ने एक बड़ा निर्देश दिया है कि डीएलएड पास को नियुक्ति में महत्व दिया जाए, उसके बावजूद भी कुछ स्कूलों में इस आदेश का उलंघन कर बीएड शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई है, तो वही कुछ स्कूलों में तो डीग्री वाले टीचर ही नही हैं, तिफरा के मूकबधिर स्कूल के छात्र ने आरोप लगाया हैं, की यहाँ ब्रेल लिपि के लिए योग्य शिक्षक नहीं है, ना डिग्री वाले शिक्षकों को नियुक्ति दी गई है ।

प्रहलाद इसी स्कूल का छात्र रहा है, उसके बाद यहां उसे अध्यापन कराने का मौका मिला, एक वर्ष पढ़ाने के बाद उसे डीग्री नहीं है कह कर हटा दिया गया हैं, प्रह्लाद का कहना है स्कूल में अधिकांश टीचर प्रशिक्षित नही हैं, जबकि विशेष स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक होना नियम में हैं।

जबकि स्कूल के प्रभारी गोलमोल जवाब देकर मामले को छिपाने की कोशिश में लगे है। प्रभारी का कहना है कि यहां रेगुलर और नोंन रेगुलर दो प्रकार के टीचर हैं जिसमें से कुछ प्रशिक्षित है तो कुछ नहीं है।

शिक्षकों के रिकॉर्ड की जांच की जाए तब पता चलेगा की स्थिति क्या है। क्योंकि विशेष स्कूलों में तो विशेष प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षक होना अनिवार्य है, यदि प्रशिक्षित शिक्षक नहीं है तो यह एक चिंता का विषय है, मामले की जांच के बाद ही स्थिति साफ हो।





