बिलासपुर में अचानक से अपराधो की बाढ़ सी आ गई है। हाल ही में मंगला क्षेत्र में एक युवक लूटपाट का शिकार हो गया। भारतीय नगर चौक पर बदमाश जेब से मोबाइल लूट कर भाग गए दयालबंद क्षेत्र से एक ही दिन में दो मोटरसाइकिल चोरी हो गई लेकिन पुलिस के हाथ खाली है, क्योंकि इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से कोई खास मदद नहीं मिली।

बिलासपुर में दावा किया गया था कि भाजपा की सरकार आते ही 15 दिनों में शहर को अपराध मुक्त कर दिया जाएगा, लेकिन हो उलट रहा है । पिछले कुछ दिनों से यहां अपराध की बाढ़ सी आ गई है। हर तरह के अपराध रोज अंजाम दिए जा रहे हैं । ऐसा लग रहा है मानो अपराधी पूरी तरह से बेखौफ हो चुके हैं । हत्या, बलात्कार से लेकर चोरी लूटपाट की घटनाएं अचानक बढ़ गई है। आश्चर्य की बात है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने और शहर भर में धारा 144 होने के बावजूद अपराधी किसी की परवाह नहीं कर रहे हैं। कई बार तो पुलिस भी अपराधियों के आगे डरती नजर आ रही है। बाइक पर स्टंट दिखाते अपराधी को जब पुलिस ने रंगे हाथों पकड़ लिया तो उल्टा चोर कोतवाल को डांटे की तर्ज पर वह उसकी वर्दी उतारने की धमकी देने लगा और पुलिस उसके आगे मिन्नत करती दिखी। बिलासपुर में लूटपाट और मोटरसाइकिल चोरी की घटनाएं लगातार हो रही है। मंगलवार को जगमल चौक और दयालबंद क्षेत्र से दो मोटरसाइकिल चोरी हो गए ।पुलिस ने आशंका जताई कि मस्तूरी का कोई मोटरसाइकिल चोर गिरोह बिलासपुर में सक्रिय है। एक युवक सफेद रंग के शर्ट और काली पैंट में मोटरसाइकिल चोरी कर भागता भी नजर आया।

पुलिस का कहना है कि अधिकांश मोटरसाइकिल चोर इसी तरह के कपड़े पहने हुए हैं, जिससे ऐसा लग रहा है कि यह किसी गैंग के सदस्य हैं। इधर लूटपाट की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही है। हाल में मंगला में एक युवक लूटपाट का शिकार हो गया। महाराणा प्रताप चौक से एक व्यक्ति का पीछा कर रहे बदमाशों ने भारतीय नगर चौक के पास उसकी जेब से मोबाइल लूट लिया । इधर पुलिस दावा करती है कि इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर तार बाहर से शहर के चप्पे चप्पे पर नजर रखी जा रही है और हर एक अपराधी उनकी नजर में है, लेकिन हो उलट रहा है । इन सभी मामलों में अपराधियों तक पहुंचाने की बात तो दूर पुलिस पीड़ित पक्ष की मदद तक नहीं कर रही। लूटपाट के शिकार व्यक्ति के पुत्र दो दिनों से घटना के फुटेज के लिए आईसीसीसी के चक्कर लगा रहे हैं।तो वहीं मोटरसाइकिल चोरी के बाद जब पीड़ित मंगलवार शाम को ही सेंटर पहुंचा तो उन्हें पुलिस कर्मियों के दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ा। पुलिस दावा करती है कि मॉनिटर पर 24 घंटे निगरानी की जा रही है लेकिन जब शाम को पीड़ित मौके पर पहुंचा तो पुलिस वालों ने कह दिया कि उनकी छुट्टी हो गई है और वे घर जा रहे हैं और उस समय केंद्र पर मॉनिटरिंग के लिए कोई नहीं था। इससे ही पुलिस के दावे खोखले प्रतीत हो रहे हैं। तो वहीं जब एक पुलिसकर्मी से बार-बार आग्रह किया गया कि वह फुटेज दिखाने में मदद करें तो उसने लगभग धमकाते हुए कहा कि अगर उस पर दबाव बनाने की कोशिश की गई तो वह दिन भर का वीडियो ही डिलीट कर देगा। तो सोचिए शहर की जनता और पुलिस के अधिकारी ऐसे कर्मियों के भरोसे अपराधियों पर नकेल कसने का ख्वाब देख रहे हैं।

जाहिर है कि निचले स्तर के पुलिस कर्मियों के कारण ही विभाग की अच्छी भली योजना भी दम तोड़ रही है । तारबाहर क्षेत्र में स्थित कंट्रोल रूम शायद केवल जुर्माना वसूलने के ही काम आ रहा है। शहर में अत्याधुनिक कैमरे लगाने के दावे किए जाते हैं लेकिन चोरी और अन्य अपराध के मौके पर ना तो गाड़ी का नंबर प्लेट ठीक से दिखता है और ना हीं अपराधी का चेहरा। लेकिन जब इसी विभाग को किसी से जुर्माना वसूलना होता है तो फिर सब कुछ बड़ी आसानी से दिख जाता है। यह शायद जनता का दुर्भाग्य है कि वह जिस विभाग से कानून व्यवस्था बहाल करने और अपराधियों को पकड़ने की उम्मीद करती है वही इसे लेकर हद दर्जे तक लापरवाह है। अगर आम लोगों को निचले स्तर के पुलिसकर्मियों की कार्यशैली का सीधा प्रसारण दिखा दिया जाए तो यकीन मानिए पुलिस पर से आम नागरिक का भरोसा उठने में एक पल नहीं लगेगा। आला अधिकारियों को भी बड़े-बड़े अफसरो की मीटिंग लेकर निर्देश देने की बजाय ऐसे छोटे पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है, जो सारी योजनाओं को पलीता लगा रहे हैं।

इधर दयालबंद क्षेत्र में हुई मोटरसाइकिल चोरी के मामले में पुलिस कोई मदद नहीं कर पाई है। बताया जा रहा है कि वीडियो में दिख रहे चोर का चेहरा स्पष्ट नहीं है। सवाल यही है तो फिर क्या कैमरे केवल वाहन चालकों से जुर्माना वसूलने के लिए लगाए गए हैं। ऐसे में पुलिस के दावो पर से लोगों का यकीन उठ जाए तो फिर दोष किसका होगा।




