शहर के थानों से जिस तरह से फरियादियों की फरियाद सुने बगैर उन्हें चलता किया जा रहा है। उससे वाकई लगने लगा है कि जिले की पुलिस व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। जबकि पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह का सभी राजपत्रित अधिकारियों और थानेदार को सख्त आदेश है कि पुलिसिंग को लेकर लापरवाही बर्दाश्त नही की जाएगी। वहीं अगर इसकी हकीकत की बात करें तो एसपी के फरमान के उलट थानों में कार्य किया जा रहा हैं।

पुलिस जिले की पुलिसिया व्यवस्था बेपटरी हो गयी है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि जिले के थानों में फरियादियों की सुनवाई नही होने के चलते उन्हें अब सीधे आईजी और एसपी के दफ्तरों के दरवाजे खटखटाने मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला थाना सिरगिट्टी के ग्राम कोरमी बारीपारा से सामने आया।जहां छेड़खानी की शिकायत दर्ज कराने के बावजूद सिरगिट्टी पुलिस ने आरोपियों पर किसी तरह से कोई कार्यवाही नही की उस पर आरोपियों ने थाने में शिकायत करने की बात कहते हुए घर मे घुसकर महिला के साथ जमकर मारपीट की।

दरअसल मारपीट की घटना से घायल हाथ पैर और सिर में पट्टी बांधे कोरमी निवासी त्रिवेणी धुरी अपने बच्चों के साथ रोती बिलखती एसपी कार्यालय पहुंची। पीड़िता त्रिवेणी ने बताया की 10 साल पहले उसके पति ने उसे छोड़ दिया था। वह अपने चार बच्चियों के साथ कोरमी ग्राम बारीपारा में रहती है और रोजी मजदूरी करके अपना घर चलाती है।बीते सोमवार शाम मोहल्ले के कुछ लोगों ने घर में घुसकर उसके और उसके बच्चों के साथ मारपीट की। उसने इस पूरे मामले की शिकायत भी सिरगिट्टी थाने में दर्ज करा दी है। बावजूद इसके सिरगिट्टी पुलिस इस मामले को गंभीरता से नही ले रही हैं। इतना ही नही इस पर आरोपियों के विरुद्ध कार्यवाही के नाम पर पीड़ित पक्ष से 8 हजार रुपये की भी मांग कर रही है। बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला छेड़खानी से जुड़ा हुआ है। फरियादी की लड़की के साथ पड़ोस में रहने वाले लड़के ने छेड़खानी की थी। जिसकी थाने में शिकायत करने के बाद आरोपियों ने पीड़ित महिला के घर मे घुसकर उसके साथ मारपीट की।

न्यायधानी में लगातार इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। हाल ही में सिरगिट्टी थाने में ही छेड़खानी रोकने वाले युवक को ही थाने में बिठा लिया गया। लड़की की रिपोर्ट नहीं लिखी गई। इसी तरह बीते दिन सिविल लाइन पुलिस ने तो मारपीट और लूट के मामले में पीड़ित पर दबाव बनाकर चोरी की रिपोर्ट लिख दी। फिलहाल हाई लाइट होकर सुर्खियों में केवल ये दो मामले ही सामने आये है। अब जरा सोचिए इसी तरह के अलग अलग थानो में ऐसे दर्जनों मामले रोजाना आते होंगे। जिस पर ना ही पुलिस अमल करती है ना यही कोई कार्यवाही करती है। यही वजह है कि इससे न्यायधानी अपराध धानी के नाम से ना केवल जाना जा रहा है बल्कि यहां अपराधियों के हौसले भी बुलंद हो चुके है।




