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तारबाहर खुदीराम बोस चौक से उर्दू स्कूल और बड़ा गिरजा चौक जाने वाले रोड को बंद करने के निर्णय से रहवासियों ने किया जमकर विरोध।

रेलवे चुचुहियापारा और बुधवारी बाजार के बाद अब तारबाहर खुदीराम बोस चौक से उर्दू स्कूल और बड़ा गिरजा चौक जाने वाले रोड को बंद करने का निर्णय लिया है। हालांकि रेलवे द्वारा इसके पीछे स्टेशन डेवलपमेंट, सड़क चौड़ीकरण और एंक्रोचमेंट रोकने का हवाला दिया जा रहा है। क्षेत्र वासियों ने किसी भी कीमत पर सड़क बंद नहीं करने देने का प्रण लेकर रेल प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध करना शुरू कर दिया है।

तारबाहर खुदीराम बोस चौक से होकर बड़ा गिरजा चौक जाने वाली 100 साल पुरानी सड़क को रेलवे ने बंद करने का निर्णय लिया है।चुकी तारबाहर और खुदीराम बोस चौक से क्षेत्रवासियों को रेलवे सीमा पर जाने के लिए आपातकालीन स्थिति के लिए यह एक मात्र रास्ता है। इसलिए सोमवार को रोड को हमेशा के लिए बंद करने पहुंचे रेलवे और क्षेत्र वासियों के बीच जमकर हुज्जत बाजी हुई। जैसे ही क्षेत्रवासियों सहित क्षेत्र के पार्षद और अन्य जनप्रतिनिधियों को इसकी सूचना मिली सभी दौड़े भागे मौके पर पहुंचे और इसका विरोध करने लगे। क्षेत्र वासियों ने कहा कि एक तो पहले से ही रेलवे के द्वारा सड़क पर पोल गाड़कर बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दिया गया है। उसके बाद अब रेलवे इस मार्ग को हमेशा के लिए बंद करने जा रहा है, जिसे वे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। जरूरत पड़ी तो क्षेत्रवासी रेलवे के खिलाफ आगे चलकर उग्र आंदोलन करेंगे। लेकिन सड़क को बंद नहीं करने देंगे। वही मौके पर पहुंचे रेलवे के अफसर ने कहा कि रेलवे स्टेशन का डेवलपमेंट कार्य होना है रेलवे के अधिकारियों ने निर्णय लिया है कि रेलवे सीमा के प्रवेश पर एंक्रोचमेंट बढ़ जाता है, इसलिए जितने भी छोटे बड़े रास्ते हैं सभी को बंद करके व्यापार विहार, जगमल चौक और तारबाहर से रेलवे प्रवेश के अन्य सड़कों को चौड़ा किया जायेगा। वहीं इसके पीछे का प्रमुख कारण रेलवे के अधिकारियों ने यह भी बताया की तार बाहर के वासी अपने दायरे से बाहर आकर रेलवे सीमा में अवस्थाएं फैला रहे हैं। इस वजह से भी रेलवे के अफसरों ने बस्ती से होकर रेलवे में प्रवेश करने वाले छोटे-छोटे सड़कों को बंद करने का निर्णय लिया है। क्षेत्र वासियों ने कहा कि वे लोग लंबे समय से तार बाहर में निवासरत है, जिस सड़क को रेलवे बंद करने की बात कह रहा है वह सड़क भी 100 वर्ष पुराना सड़क है ऐसे में रेलवे को किसी तरह का कोई अधिकार नहीं की वर्षों पुरानी सड़कों को रेलवे अपने फायदे के लिए बंद करें।

बहरहाल जानकारी यह भी मिल रही है कि रेलवे एंक्रोचमेंट और विकास का हवाला देकर तार बाहर सहित नगर निगम सीमा के जितने भी छोटे छोटे रास्ते हैं सभी को बंद करने जा रहा है। इसी तरह एक मामला तार बाहर खुदीराम बोस चौक से होकर उर्दू स्कूल होते हुए बड़ा गिरजा जाने वाला एक मार्ग भी है।

गौरतलब हो कि रेलवे ने पूर्व में भी इसी तरह के अड़ियल रवैया अपना कर अपने फायदे के लिए चुचुहियापारा और बुधवारी बाजार सहित अन्य सड़कों पर खूंटा गाड़कर रास्ता ब्लॉक कर चुका है। हालांकि अब उन रास्तों से छोटे-छोटे वाहन ही गुजर पाते हैं। ऐसे में यदि आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस या फिर अन्य कोई वाहन रेलवे सीमा में प्रवेश करना चाहे तो भी वह प्रवेश नहीं कर सकते। इसी तरह अब जिस तरह से तार बाहर सहित अन्य छोटे-छोटे बस्तियों के सड़कों को रेलवे द्वारा बंद किया जा रहा है। निश्चित ही आने वाले समय में आपातकालीन स्थिति के समय सड़कों के बंद होने से इन क्षेत्रों में गंभीर समस्या निर्मित हो सकती है। फिलहाल देखने वाली बात होगी कि क्या तार बाहर वासियों सहित अन्य क्षेत्रवासी भी रेलवे के इस तुगलकी फरमान के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करेंगे या फिर रेलवे दबाव पूर्वक इसी तरह सभी सड़कों को बंद कर देगा।

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