प्रदेश के शासकीय और अशासकीय विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में अगले सत्र से राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू हो जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग के पास राष्ट्रीय शिक्षा नीति की तैयारी के लिए मात्र 2 महीने बचे हैं।

1 जुलाई से नया सत्र शुरू होगा। उच्च शिक्षा विभाग ने तैयारी के लिए 6 कमेटियां बनाई है यह कमेटियां अध्यादेश, विनियम, परिनियम, आयोग, परिषद के गठन सहित अन्य कार्य कर रही है वही एक कमेटी पाठ्यक्रम निर्माण का कार्य कर रही है पाठ्यक्रम निर्माण के लिए केवल 25 कमेटी बनाई है जो अलग-अलग विषयों का पाठ्यक्रम तैयार कर रही है ऐसे में इस कमेटी ने निर्णय लिया है कि 4 वर्षीय स्नातक कोर्स में मल्टीपल एंट्री और मल्टीप्ल एग्जिट का ऑप्शन है। ऐसे में जो छात्र प्रवेश के 1 साल बाद छोड़कर जाता है तो उसे सर्टिफिकेट दिया जाएगा। वही 2 साल में छोड़कर जाने वाले को डिप्लोमा दिया जाएगा। 3 साल में डिग्री और 4 साल में ऑनर्स की डिग्री मिलेगी। अब ऐसे में पाठ्यक्रम तैयार करने वाली कमेटी ने निर्णय लिया है की जो छात्र एक साल में कोर्स छोड़कर जाएंगे उन्हें तभी सर्टिफिकेट दिया जाएगा जब वे अपने विषय के अनुसार किसी भी इंडस्ट्री मैं 60 घंटे का इंटर्नशिप करेंगे। अगर वे यह कार्य पूरा नहीं करते हैं तो सर्टिफिकेट या डिप्लोमा नहीं मिलेगा।


अब ऐसे में छात्रों को एनईपी के तहत अतिरिक्त विषय पढ़ने के साथ-साथ ही फील्ड का ज्ञान भी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। जिससे छात्रा स्किल्ड हो सके। सभी कमेटी अपना प्रोजेक्ट उच्च शिक्षा विभाग शॉप रहे हैं इसके बाद अंतिम निर्णय उच्च शिक्षा विभाग लेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत छात्रों को अपने विषय के साथ-साथ हिंदी अंग्रेजी और कम्युनिकेशन का कोर्स पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है। जिसके साथ ही छात्रों को कौशल विकास के कोर्स भी पढ़ने होंगे साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा के कोर्स भी पढ़ने होंगे जिसके 40 पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहे हैं अपने कोर्स के अलावा जिस भी विषय में छात्र को रुचि हो वह उसका चयन कर सकते हैं। कमेटी के अनुसार चौथा साल लगने के बाद ऑनर्स डिग्री छात्रों को दी जाएगी। वहीं जिन छात्रों का चौथे साल में 75% से अधिक अंक होगा उसे ऑनर्स डिग्री विद रिसर्च दिया जाएगा। ऐसे में पांचवें साल छात्र पीजी की जगह डायरेक्ट पीएचडी कर सकते हैं।


