Homeहमर बिलासपुरकानन पेंडारी में वन्य प्राणियों को गर्मी से राहत देने के लिए...

कानन पेंडारी में वन्य प्राणियों को गर्मी से राहत देने के लिए प्रबंधन ने कूलर और खस की व्यवस्था, शेर और तेंदुए के केज में कूलर व खुले के जू में स्प्रिंकलर।

इन दोनों भीषण गर्मी पड़ रही है। वन्य प्राणियों को इससे राहत देने के लिए कानन प्रबंधन ने कूलर और खस लगाए हैं। खस लगाकर इन्हें पानी से सींचने की व्यवस्था की गई है ताकि वन्य जीवों के शरीर का तापमान नियंत्रित रहे। कानन पेंडारी में शेर और तेंदुए के केज में कूलर लगाने के साथ खुले के जू में स्प्रिंकलर की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही कानन पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए भी खास प्रबंध किये गए हैं।

हर साल की तरह इस साल भी भीषण गर्मी के मद्देनजर कानन जू प्रबंधन ने वन्य प्राणियों को गर्मी से बचाने खास प्रबंध किए है। यहां पक्षियों और छोटे जीव जंतुओं के लिए खस की व्यवस्था की गई है तो वहीं दूर दराज से कानन पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए भी ठंडे पानी सहित अन्य व्यवस्था दुरुस्त कर लिए गए है। कानन प्रबंधन द्वारा वन्य प्राणियों के केजों और बाड़ों में तीन से चार बार प्रतिदिन पानी का छिडक़ाव किया जा रहा है। तेज गर्मी के कारण कानन पेंडारी के वन्य प्राणियों को भी परेशानी हो रही है।इसे देखते हुए कानन प्रबंधन ने सभी वन्य प्राणियों के केज में कूलर,पंखे और खस की व्यवस्था की है। इसके साथ ही खुले शाकाहारी वन्य प्राणियों के केजों में स्प्रिंकलर लगाएं गए है। यहां हर साल 20 अप्रैल के बाद वन्य प्राणियों को ठंडी हवा देने की व्यवस्था की जाती है। लेकिन बीच बीच में रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण अबतक जू के शाकाहारी और मांसाहारी वन्य प्राणी ज्यादा प्रभावित नही हुए है। अधीक्षक बीएस राजपूत ने बताया कि मांसाहारी वन्य प्राणियों के केज के अन्दर बने रूम में कूलर की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा पक्षियों के केज में खस लगाया गया है। जिसे प्रतिदिन तीन से चार बार पानी से सींचा जाता है। सबसे ज्यादा पानी मांसाहारी वन्य प्राणियों के केज में डाला जाता है।

बाघ और तेंदुआ के केज में पाइप से चार पांच बार पानी डाला जाता है। वहीं चीतल, नील गाय सहित अन्य शाकाहारी वन्यप्राणियों के केज में स्प्रिंक्लर लगाया है जिससे पानी का छिडक़ाव किया जाता है। गर्मी का असर वन्य प्राणियों में दिखने लगा है। घास मैदान में विचरण करने वाले वन्य प्राणी सांभर केज के बाहर पेड़ के नीचे दिनभर बैठे रहते हैं। दरियाई घोड़ा दिनभर पानी के अन्दर रहता है। शाम होने पर ही पानी से बाहर निकलता है। भालू के बाड़े में पत्तेदार पेड़ अधिक हैं वह धूप तेज होते ही पेड़ पर चढ़ जाता है और शाम होने पर ही नीचे आता है। नील गाय सहित अन्य जानवर दोपहर पेड़ के नीेचे पाए जाते हैं। अधीक्षक ने बताया कि सूरज ढलने के एक घंटे बाद कूलर की आवश्यता नहीं होती है। कानन पेंडारी में चारों ओर पेड़ पौधे हैं। इसलिए सूरज ढलते ही कानन पेंडारी में ठंडक होना चालू हो जाता है। इसके साथ ही पर्यटकों के लिए भ्रमण स्थल पर पौधों और पत्तों के छाँयादार शेड बनाएं गए है। ज्यादा धूप पड़ने पर पर्यटक इनके नीचे रुककर आराम करते देखे जाते है। इसके साथ ही पर्यटकों के लिए जगह जगह ठंडे पानी के लिए वाटर कूलरों की भी व्यवस्था की गई।

कानन पेंडारी चिड़ियाघर में तापमान बढ़ने से वन्यप्राणियों की जतन और बेहतर ढंग से की जा रही है। जू कीपर से लेकर वनकर्मी और अधिकारियों को भी एक-एक केज की निगरानी रखने का आदेश दिया गया है। केज का तापमान उनके अनुकूल रखने के लिए अब चार से पांच बार पानी का छिड़काव हेतु केज में बनी पानी टंकी को पूरे समय भरे रखने के लिए कहा गया है। पक्षियों के केज के बाहर लगाए गए खस को शाम तक गिला रखने के लिए कहा गया।वर्तमान में तापमान बढ़ गया है। इससे कानन पेंडारी जू में पर्यटकों की संख्या में कमी आई है। हालांकि यह प्राकृतिक अड़चन है। इसलिए कुछ नहीं किया जा सकता है। यह जरूर है कि गर्मी का असर वन्यप्राणियों पर न पड़े। इसके लिए मैदानी अमले को पूरे समय अलर्ट रहने का आदेश दिया गया।

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