बिलासपुर जिले के कोटा नगर पंचायत के सीएमओ और उनके चहेते ठेकेदार ने मिलकर शासन के पैसों का दुरुपयोग और खानापूर्ति करते हुए लाखों रुपए गबन किया है। बिलासपुर मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर नगर पंचायत कोटा के वार्ड क्रमांक 14 के टापू सतह पर प्राथमिक शाला धरमपुरा मौजूद है। स्कूल भवन टापू पर बने होने के कारण नगर अधिकारी और ठेकेदार के लिए कमाई का जरिया बन गया है।
कोटा के वार्ड क्रमांक 14 में शासकीय प्राथमिक शाला धरमपुरा है। जहां 159 बच्चे अध्ययन करते हैं। टापू पर स्कूल भवन होने से तेज हवा सेड को उड़ा ले जाती है। और ऐसा एक बार नहीं बल्कि कई सालों से ये घटना बार-बार हो रही है। तेज हवा चलने से सेड उखड़कर बाहर गिर जाती है और स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हो जाते हैं। हालांकि अब तक हुए हादसों से कभी किसी बच्चे, शिक्षक या स्थानीय लोगों को नुकसान नहीं पहुंची। लेकिन बार-बार उड़ रहे टीन की सीटें किसी बड़े दुर्घटना का, मानों इंतजार कर रही हों।

स्कूल भवन में सीट उड़ने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है। साथ ही स्कूल के मरम्मत के लिए बार बार आने वाले लाखों रुपए से ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारी हर बार मोटी रकम अपने हिस्से कर लेते हैं और दिखावे का काम कर वाहवाही बटोरते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक जिला प्रशासन अब तक इस स्कूल भवन में मरम्मत के लिए जितना खर्च कर चुकी है,उन पैसों से एक और नई बिल्डिंग खड़ी की जा सकती है। इसके बावजूद भी जवाबदार अधिकारी अपने स्वार्थपूर्ण इरादों से समस्या का स्थाई समाधान नहीं निकालते। बल्कि हर साल इसे अपनी कमाई का जरिया बनाते हुए खाना पूर्ति कर सिर्फ और सिर्फ मरम्मत कार्य कर देते हैं।

मिली जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन ने डीएमएफ मद से जर्जर स्कूल भवन के मरम्मत कार्य के लिए वर्ष 2024-25 में लगभग 9 लाख रूपए स्वीकृत किए। प्रशासन ने इस काम का जिम्मा नगर पंचायत कोटा को दिया। जहां जवाबदार नगर पंचायत सीएमओ और अध्यक्ष ने अपने चहेते ठेकेदार को मरम्मत कार्य सौंपा। नौ लाख रुपए में पूरे स्कूल भवन के छत को लेंटर किया जा सकता है। लेकिन अधिकारी ने काम की स्वीकृति में छत की ढलाई न करते हुए सिर्फ टीन के सीट लगाने ठेकेदार को प्रस्तावित किया। ठेकेदार विशेष गुप्ता और छोटे भाई ने मिलकर नगर पंचायत सीएमओ के निर्देशन पर अपना काम शुरू कर दिया। लेकिन गजब की बात यह सामने आई कि जिस काम के लिए जिला प्रशासन ने लगभग 9 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। उस ठेकेदार ने किसी अन्य व्यक्ति से इस काम को 20 टीने के सीट और लोहे की पाइप सहित मात्र 7 हजार में करा लिया।

अब स्थानीय लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा हैं कि इस स्कूल भवन के मरम्मत के लिए शासन से स्वीकृत राशि 9 लाख रुपए में 20 टीन की सीट, लोहे की पाईप और कुछ अन्य सस्ते सामानों के साथ मजदूरों को 7 हजार रुपए देकर काम पूरा करा लिया हो तो ऐसे में लोगों के मन में ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के प्रति भ्रष्टाचार का आरोप लगना तय है। बहरहाल देखना होगा कि जिले के कलेक्टर अवनीश शरण और जिला शिक्षा अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और भ्रष्टाचार का खेल, खेल रहे जवाबदार अधिकारी और ठेकेदार पर क्या कार्रवाई करते हैं।


