नए शिक्षण सत्र की शुरूआत इस बार 26 जून से हो जाएगी। सभी स्कूलों के पट खुलने के साथ ही शाला प्रवेसोत्सव का कार्यक्रम मनाया जाएगा। इसकी तैयारी में शिक्षा विभाग के अफसर जुटे हुए हैं। सभी सरकारी स्कूलों में कार्यक्रम का आयोजन किया जाना है। चंद दिन बाद ही स्कूल खुलेंगे लेकिन दावो के उलट स्कूल की व्यवस्था अब भी बदहाल बनी हुई हैं, कई स्कूल ऐसे हैं जो एकल शिक्षकीय और शिक्षक विहीन है, ऐसे में अब शिक्षा के मंदिर में शिक्षक के ही ना रहने से पढ़ाई कैसे होगी, जबकि शिक्षा अधिकारी का कहना है कि जल्द ही शिक्षको की नियुक्ति कर ली जाएगी।

सवाल है कि साल भर में जब शिक्षक नियुक्त नहीं हो पाए तो चंद दिनों में कैसे शिक्षक स्कूलों में पदस्थ हो पाएंगे, यह एक बड़ा प्रश्न चिन्ह है। टीचरों की कमी पिछले साल की तरह इस वर्ष भी हैं, ऐसे में शाला प्रवेश उत्सव केवल एक औपचारिकता ही बनकर रह जाएगी। बजट में शिक्षा विभाग को आवंटन की कोई कमी नहीं की जाती है, उसके बावजूद भी शिक्षा व्यवस्था का यह हाल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाता है, कि विभाग बच्चों की पढ़ाई को लेकर कितना संजीदा हैं, इसका अंदाजा तो इस बात से लगाया जा सकता है कि हर बार की तरह इस बार भी 40% बच्चे फेल हो गए हैं, उसके बावजूद भी गलतियों से सबक न लेते हुए विभाग केवल दावे कर रहा है।


