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शासन-प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग ने सिम्स की चरमराई व्यवस्था दुरुस्त करने में झोंक दी ताकत, लेकिन सिम्स की व्यवस्था आज भी नीरस।

शासन, प्रशासन, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने सिम्स की चरमराई व्यवस्था दुरुस्त करने भले ही पूरी ताकत झोंक दी हो। लेकिन सच्चाई तो यही है कि आज भी सिम्स की व्यवस्था नहीं सुधर सकी है। जिस तरह पहले सिम्स के कीमती उपकरण एफआईआर और सिटी स्कैन जैसे अन्य मशीन खराब हो रहे थे, वही स्थिति आज भी बरकरार है। आज भी मशीनरी उपकरणों के खराब हो जाने पर दूर दराज से इलाज के लिए सिम्स आने वाले मरीजो को बाहरी लैबों में जाकर मोटी रकम देकर उन्हें अपना जांच करवाना पड़ रहा है। यही वजह है कि सिम्स के बाहर संचालित होने वाले निजी लैब, डायग्नोस्टिक सेंटर संचालकों के दुकान जोरो से चल रही है। इसी तरह की एक समस्या गुरुवार को फिर से नकार आई।दरअसल सिम्स की सिटी स्कैन मशीन कुछ दिनों से खराब पड़ी हुई है। जिसके मरम्मत करवाने शायद सिम्स प्रबंधन रुचि नही दिखा रहे है। डॉक्टर भी कमीशन के चक्कर मे बकायदा सिम्स के बाहर संचालित लैब और डायग्नोस्टिक सेंटरों पर सिम्स के मरीजों को जांच के लिए भेज रहे हैं।

तिफरा के रहने वाले किसान होरी लाल वर्मा ने बताया कि उनके बेटे राजीव वर्मा का एक्सीडेंट हो गया है जिसको इलाज के लिए वे सिम्स लेकर पहुंचे है यहां ना तो ठीक से इलाज हो रहा है ना ही जांच पड़ताल के लिए कोई साधन संसाधन उपलब्ध है। किसान ने बताया कि वे गरीब है इसलिए निजी अस्पताल में अपने बच्चे का इलाज नही करा पा रहे है।इसलिए लगभग 20 दिनों से सिम्स के डॉक्टर जबरिया उनके बच्चे को यहां भर्ती करके रखे है।उनके बेटे के सिर सहित पैर हाथ मे गम्भीर चोट आई है। उस पर यहां का सिटी स्कैन मशीन खराब है जिसके चलते उन्हें सिम्स के सामने वाले जायसवाल डायग्नोस्टिक सेंटर जाकर 17सौ रुपये देकर सिटी स्कैन करवाना पड़ा। किसान ने सिम्स की व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर कर शासन प्रशासन को जमकर कोसा।

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