इन दिनो सब्जी के रेट मानो आसमान छू रहे हैं। टमाटर से लेकर हरी सब्जियों के रेट काफी महंगे चल रहे हैं। शहर में बाहर से सप्लाई हो रही है यही कारण है कि सब्जियों के रेट महंगे हो गए हैं। टमाटर के दाम थोक में ही ₹50 किलो हो गए हैं। चिल्लर में यह ₹80 किलो तक बिक रहा है। सीजन में पहली बार कीमत इतना ज्यादा हुआ है। वही भिंडी, बरबटी, करेला, गोभी जैसी सब्जियों के दाम भी बढ़ गए हैं। अदरक एक बार फिर ₹50 पाव में बिक रहा है। सब्जियों की कीमत में बढ़ोतरी से रसोई का बजट गड़बड़ा होने लगता है। सबसे ज्यादा परेशानी टमाटर की वजह से हो रही है। महिलाओं का कहना है कि हर सब्जी में टमाटर अनिवार्य रूप से पड़ता है। लेकिन इसके दाम में वृद्धि होती ही जा रही है। महज कुछ ही दिनों में इसकी कीमत दुगनी हो चुकी है। जो टमाटर कुछ दिन पहले ₹40 किलो मिल रहा था। वह अब ₹80 किलो हो चुका है। बृहस्पति शनिचरी हो या फिर बुधवारी या फिर अन्य कोई छोटा बाजार सब जगह यही दाम चल रहा है। वही क्वालिटी से समझौता करने पर कहीं टमाटर ₹70 किलो भी मिल रहा है। अच्छी क्वालिटी नहीं होने पर यह जल्दी खराब हो जा रहा है। वही भिंडी ₹50 बरबटी ₹60 कद्दू ₹50 तो कुंदरु भी 40 से ₹50 किलो में बिक रहा है। यह सारी सब्जियां कुछ दिन पहले तक 20 से 30 रुपए किलो में मिल जा रही थी।

सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि आसपास की बाङियो से सब्जियों का उत्पादन काफी कम हो गया है। यही कारण है कि ज्यादातर सब्जियां बाहर से लाई जा रही है। इसकी वजह से सब्जियों के रेट में वृद्धि हुई है। बृहस्पति बाजार के पूर्व अध्यक्ष ने बताया कि अभी लोकल उत्पादन में काफी कमी आ गई है। वहीं ज्यादातर सब्जियां बाहर से आ रही है। वहां भी उत्पादन कम है। ऐसे में एक माह तक यानी जब तक नई फसल नहीं आ जाती, सब्जियों के दाम में बहुत कमी आने की उम्मीद नहीं है। वही थोक विक्रेताओं के मुताबिक अभी बेंगलुरु से केवल दो गाड़ी टमाटर की आवक हुई है।



बताया जा रहा है कि वहां भी उत्पादन कम है। जैसे-जैसे उत्पादन बढ़ेगा, आवक में वृद्धि होगी। इससे दाम में भी थोड़ी गिरावट आएगी। पर इतनी जल्दी दाम बहुत कम होने की उम्मीद तो नहीं है। चुकी टमाटर हर सब्जी की पूरक सब्जी है। इसलिए इसके दाम में वृद्धि होने का असर दूसरी सब्जियों पर भी पड़ता है।
बृहस्पति बाजार में टमाटर के दाम पूछे गए तो विक्रेताओं ने 80 रुपए किलो बताया वही देखा गया कि ज्यादातर लोग आधा किलो टमाटर ही खरीद रहे हैं। सस्ता रहने पर 2 से 3 किलो खरीद रहे थे। वही लौकी ₹30 किलो होने के कारण इसकी डिमांड बढ़ गई है। विक्रेताओं के अनुसार अभी सब्जियों के रेट में गिरावट की आशंका कम है।


