बिलासपुर में स्वच्छता सर्वे में इस बार घरों में जाकर टीम यह देखेगी कि घरों में गीले और सूखे कचरे के लिए अलग-अलग डस्टबिन है या नहीं क्योंकि आउटर के आधे से ज्यादा घरों में अभी डस्टबिन ही नहीं बंटे हैं।
शहर में जो डस्टबिन बांटे गए थे वहां भी गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग डिब्बो में नहीं रखा जाता है। आउटर के वार्ड में हर दिन डोर टू डोर कचरा कलेक्शन नहीं होता। जहां कचरा कलेक्शन हो रहा है वहां दोनों तरह के कचरे एक साथ लिए जाते हैं। एक और चुनौती यह भी है कि हर दिन 200 टन कचरा कलेक्ट होता है। इसकी प्रोसेसिंग भी नहीं हो रही है। पूरे देश में 5 जुलाई से स्वच्छता सर्वेक्षण की शुरुआत होगी। पिछली बार छोटी-छोटी गलतियों के कारण बिलासपुर का पायदान दो रैंक पीछे चला गया था। इस बार भी वही स्थिति नजर आ रही है।



इस बार घरों में गिला और सूखा कचरा रखने के लिए हरे और नीले रंग का डस्टबिन नहीं होने पर रैंक घटेगा। यही नहीं बल्कि कचरे में ठोस मिलने या कछार में प्रोसेसिंग नहीं होने पर भी अंक कटेंगे। आउटर के वार्ड को छोड़कर शहर में रोजाना 200 टन कचरे का उठाव होता है। इन कचरो को डंपिंग यार्ड कछार पहुंचाया जाता है। पर रोज इतने कचरो की प्रोसेसिंग नहीं हो पाती है। यानी 200 टन कचरे का खाद नहीं बन पाता है। कोनी, बहतरई और अन्य कई जगहों पर अभी तक कचरे से खाद बनाने का काम शुरू नहीं किया गया है। यहां कचरा को कछार लेकर जाया जाता है।



स्वच्छता सर्वेक्षण 5 जुलाई से शुरू हो रहा है। केंद्रीय शहरी आवासीय विभाग की टीम अलग-अलग निकायों में जाकर वहां की सफाई व्यवस्था देखेगी। और लोगों से फीडबैक लेगी। इसके आधार पर ही शहरों का रैंक तय होगा। पिछले सर्वे में बिलासपुर को 28 वा रैंक मिला था। बताया जा रहा है कि इस बार रैंक में सुधार की कोशिश की जा रही है। क्योंकि पूर्व सर्वे में जो कमियां पाई गई थी। उस पर सुधार किया गया है। पिछले सर्वेक्षण में टीम ने 1000 से अधिक लोगों से फीडबैक लिया था। 500 से अधिक जगह की तस्वीर मोबाइल में कैद कर केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय को भेजी गई थी। टीम ने आउटर में न केवल सफाई का जायजा लिया बल्कि लोगों से सफाई की हकीकत को भी जाना था। नियमित सफाई और डोर टू डोर कचरा कलेक्शन नहीं होना भारी पड़ गया था।



इस बार व्यवस्था सुधारने साल भर का मौका मिला फिर भी निगम की टीम कोई खास व्यवस्था में सुधार नहीं कर पाई। शहर के अधिकांश भीड़ वाले जगह पर कचरे का भंडार पड़ा रहता है। जो सङ कर बदबू तक फैला रहे हैं। रोजाना निगम की गाड़ी यहां से आना-जाना करती है। लेकिन इन बदबूदार कचरो पर किसी की नजर नहीं पड़ रही है। शहर को गंदा और अस्वच्छ बनाने में इनका सबसे बड़ा हाथ है। क्योंकि शहर में जगह-जगह पर रखे कंटेनर समय से खाली नहीं किए जाते हैं। जिसकी वजह से कंटेनर में कचरा भरकर गिरता है और बदबू का कारण बनता है।
बताया जा रहा है कि आउटर के वार्डों में सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कचरा गाड़ियों की भी खरीदी कर ली गई है। अब नियमित सफाई और डोर टू डोर कचरा कलेक्शन रोजाना किया जाएगा।



