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रेल प्रशासन के अधिकारियों के अड़ियल रवैए पर आपत्ति जताते हुए सर्वदलीय एवं जनसंगठनों के संयुक्त मंच के पदाधिकारियों ने बिलासपुर प्रेस क्लब पहुंचकर पत्रकारों से की चर्चा।

रेल प्रशासन के अधिकारी अड़ियल रवैय्या अपनाते हुए रेल परिक्षेत्र के वर्षो पुराने सड़कों को बन्द कर रहे है। कोरोना काल के समय से ट्रेनों को रद्द करने का सिलसिला थम नही रहा है। वहीं नियम विरुद्ध पूर्व रिटायर्ड प्राचार्य को फिर से अलग-अलग रेलवे स्कूलों का मैनेजर बना दिया गया। इस पर आपत्ति जताते हुए सर्वदलीय एवं जनसंगठनों के संयुक्त मंच के पदाधिकारियों ने बिलासपुर प्रेस क्लब पहुंचकर पत्रकारों से चर्चा की।

प्रेस क्लब पहुंचे पदाधिकारियों ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए एसईसीआर बिलासपुर के रेलवे अधिकारियों पर कई गंभीर आरोप लगाए। इतना ही नही लगातार हो रहे रेल हादसों का जिम्मेदार भी सर्वदलीय एवं जनसंगठनों के संयुक्त मंच ने रेल मंत्री को माना और कहा, ऐसे गैरजिम्मेदार रेल मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए। सर्वोदय मंच ने कहा कि एसईसीआर रेलवे के अधिकारियों ने अड़ियल रवैया अपनाते हुए पहले तो बुधवारी बाजार और चुचुहियापारा जाने वाले वर्षों पुरानी मार्ग पर खंभा गाड़ दिया। उसके बाद फिर भारत माता स्कूल से रेलवे हॉस्पिटल जाने वाले वर्षों पुराने सड़क को अवैध तरीके से हमेशा के लिए बंद कर दिया।फिर धीरे-धीरे केंद्रीय विद्यालय से गुरुनानक चौक जाने वाले मार्ग के आसपास रेलवे सीमा में प्रवेश वाले मार्ग को बन्द किया। साथ ही तारबाहर खुदीराम बोस चौक वाले रास्ते पर भी खूंटा गाड़ दिया। इसका विरोध भी किया गया लेकिन अबतक रेलवे के अधिकारी मौन है।इसी के साथ रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव के कार्यकाल के दौरान अबतक 536 रेल हादसे हुए जिसपर रेल मंत्री ने हमेशा ही रेल कर्मचारियों को ही दोषी माना। इसी तरह वर्तमान में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के पास हुए ट्रेन हादसे में भी रेलमंत्री ने ड्राइवर को दोषी मानकर उसे सस्पेंड कर दिया ।संगठन के अनुसार सिग्नल 6 घंटे से फेल था एवं सबसे बड़ी लापरवाही की बात यह है कि रेल्वे द्वारा सिग्नल में मेंटेनेंस का कार्य प्राइवेट ठेकेदारों द्वारा करवाया जाता है। रेल्वे के नियमानुसार ड्राईवर को आठ घंटे की ड्यूटी के पश्चात् अनिवार्यतः विश्राम दिया जाना हैं, परंतु दुर्घटनाग्रस्त मालगाड़ी के ड्राइवर को लगातार तीन पालियों में रात्रि की ड्यूटी करने के पश्चात् विश्राम से उठाकर दबावपूर्वक ड्यूटी में भेज दिया गया। रेल मंत्री दुर्घटना की जांच पूर्ण हुए बिना मालगाड़ी के ड्राईवर को इस दुर्घटना का जिम्मेदार बताकर देश की आम जनता के समक्ष गलत तथ्य प्रस्तुत कर रहे हैं।इन दुर्घटनाओं का मूल कारण रेलवे की संरक्षा के डेढ़ लाख पद खाली हैं एवं कुल रिक्तियाँ तीन लाख से अधिक है। सवारी रेलगाड़ी की संख्या लगातार बढ़ रही है। काम का दबाव बढ़ रहा है। यार्ड, पटरी एवं प्लेटफॉर्म की संख्या सीमित है। 1974 में 24 लाख रेल कर्मी सेवा में थे। 2024 में रेलों की संख्या 100 गुना बढ़ चुकी है। कर्मचारियों के स्वीकृत पद 15 लाख हैं परंतु अभी 12 लाख कर्मचारी कार्यरत है एवं 3 लाख पद खली हैं। ठेका करण के कारण सुरक्षा से अनवरत खिलवाड़ हो रहा है। बुलेट ट्रेन, वंदेभारत जैसी नई ट्रेन चलाने की बजाए रेलवे की आधारभूत संरचना का विकास आज की प्राथमिक आवश्यकता है।

बिलासपुर रेल प्रशासन द्वारा स्कूल मैनेजर के पद पर एक सेवा निवृत्त रेल्वे स्कूल के प्राचार्य को रेलवे द्वारा तमाम नियमों को ताक पर रखकर नियुक्त करके 50,000/- प्रतिमाह वेतन भुगतान किया जा रहा है। एस.ई.सी. आर बिलासपुर को छोडकर पूरे भारत वर्ष में मैनेजर का पद कही भी नही है। रेलवे स्कूल के पूर्व प्राचार्य के.के. मिश्रा सबसे पहले संविदाकर्मी के रूप में सर्वो स्कूल चक्रधरपुर डिवीजन में नियुक्त हुए उसके बाद सीधे बिलासपुर में गणित शिक्षक के रूप में उनकी नियुक्ति हुई थी। प्राइवेट ट्यूशन करने के कारण उन्हें निलंबित कर दिया गया था। अपनी पहुंच का फायदा उठाकर एक माह में अपना निलंबन उन्होंने वापस करवा लिया। कुछ समय बाद एस.ई. रेल्वे में मिक्ग्रड हायर सेकेण्डरी इंग्लिश मीडियम स्कूल में अनेक वरिष्ठ शिक्षकों की वरिष्ठता का उल्लंघन करते हुए उन्हें प्राचार्य नियुक्त कर दिया गया। प्राचार्य बनने के बाद स्कूल के विकास के बजाये अपने व्यक्तिगत प्रचार, प्रसार में लगे रहे। उनके कार्यकाल में किसी भी बोर्ड परीक्षा या विश्व विद्यालय में कोई भी छात्र मेधावी छात्र के रूप में मेरिट लिस्ट में जगह नहीं बना पाया है और ना ही यूनिवर्सिटी में टॉप किया है।जबकि पूर्व में रेलवे स्कूल से कई मेघावी छात्रों ने स्कूल एवं शहर का नाम रोशन किया। जिसमें डॉक्टर चंद्रशेखर, डॉक्टर संदीप गुप्ता, आरपी मण्डल, मुकुल सिन्हा जैसे बड़े नाम शामिल है।

बहरहाल विभिन्न मांगों को लेकर शनिवार को बिलासपुर प्रेस क्लब पहुंचे सर्वदलीय एवं जनसंगठनों के संयुक्त मंच के पदाधिकारियों ने एसईसीआर का पर्दाफाश कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी नही हुई तो सर्वदलीय एवं जनसंगठनों के संयुक्त मंच के द्वारा बिलासपुर जोनल कार्यालय के बाहर उग्र प्रदर्शन किया जायेगा।जिसका जिम्मेदार एसईसीआर होगा।

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