अपनी जमीन पावर प्लांट के लिए ना देने और विरोध जताने पर पुलिस ने एक किसान को गुंडा बना दिया। यही नहीं उसके खिलाफ पांच अलग-अलग मामले में एफआईआर भी दर्ज कर दिया गया है। परेशान किसान ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने की गुहार लगाई है। मामले की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने इस कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई।

कोर्ट ने राज्य शासन और रायगढ़ एसपी एवं संबंधित थाना के थाना प्रभारी को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने कहा है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता किसान के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच में याचिका की सुनवाई हुई। नाराज चीफ जस्टिस ने राज्य शासन के अधिकारियों से पूछा कि ये कहां का कानून है। बिना किसी प्रक्रिया और सूचना के किसी का नाम गुंडा सूची में कैसे शामिल हो सकता है। प्रदेश में कोई नियम कानून है भी या नहीं। नाराज कोर्ट ने यह भी कहा है कि किसी अपराध और सूचना के किसी का नाम गुंडा लिस्ट में कैसे शामिल किया जा सकता है। मामला रायगढ़ जिले के तमनार का है। किसान आशुतोष बोहिदार की मां के नाम पर गांव में जमीन और आवास है। निजी कंपनी द्वारा तमनार में पावर प्लांट लगाने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जा रही थी। इसका आशुतोष ने विरोध किया था। इस पर उसके खिलाफ थाने में पांच अलग-अलग मामले दर्ज करा दिए गए। साथ ही पुलिस ने जून 2022 में उसका नाम गुंडा सूची में शामिल कर दिया। लोकसभा चुनाव के दौरान पुलिस ने गुंडा बदमाशों की सूची जारी की तब उसका भी नाम शामिल था।

इस बात की जानकारी मिलने के बाद सूचना के अधिकार के तहत आवेदन देकर किस अपराध के तहत उसे गुंडा सूची में शामिल किया गया है, जानकारी मांगी। आरटीआई की जानकारी में उसके खिलाफ पांच मामले में एफआइआर दर्ज करने की जानकारी दी गई। इसमें शांतिभंग, धमकी, हमला के आरोप लगाए गए हैं। आशुतोष ने अपनी याचिका में कहा है कि पुलिस ने जिन प्रकरणों में उसे आरोपित बनाया है, उसकी जानकारी उसे ही नहीं है। बिना किसी नोटिस, समंस या प्रक्रिया के उसको गुंडा घोषित कर सूची में शामिल भी कर दिया गया। जबकि ना तो वह किसी प्रकरण में थाने, लॉकअप या जेल गया है, ना कभी उसकी कोई पेशी हुई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि पुलिस की गुंडा सूची में शामिल होने वाले आदतन बदमाश, सजायाफ्ता या आपराधिक प्रवृत्ति के लोग होते हैं। इसलिए उसका नाम सूची से हटाकर कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। कोर्ट ने तर्कों से सहमत होकर याचिकाकर्ता का नाम सूची से हटाने के निर्देश दिए हैं।


