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नगर निगम के नाम पर दुकानों पर सालों से कोई और वसूलता रहा किराया, निगम ने बनाई जांच कमेटी।

बिलासपुर में लाखों के घोटाले का खुलासा हुआ है। नगर निगम की दुकानों का किराया सालों से निगम की ही रसीद बुक के सहारे कोई और वसूलता रहा। कुछ दुकान संचालकों ने किराए की रसीद नहीं मिलने पर इसकी शिकायत सीधे कमिश्नर अमित कुमार से की। उन्होंने दो अफसरों की जांच टीम बिठा दी। जांच में गड़बड़ी पाई गई है जिस पर कार्यवाही की अनुशंसा करते हुए रिपोर्ट आगे बढ़ा दी गई है।

जांच अधिकारी शुक्रवार को उन दुकानदारों से मिले। उनके बयान और जिनके पास जो रसीद मिली उसे इकठ्ठा किया तो चौंकाने वाली बात यह सामने आई। पता चला कि वसूल की गई रकम नगर निगम के कोष में जमा नहीं हुई। मामला वार्ड क्रमांक 50 बैरिस्टर छेदीलाल नगर स्थित 40 दुकानों का है। नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार ने बताया कि बहतराई स्टेडियम के पास मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के अंतर्गत 4 साल पहले 40 दुकानों का निर्माण किया गया था। इन दुकानों का किराया नियमित रूप से वसूल करने, रसीद नहीं देने जैसी शिकायतें उनके पास पहुंची तो उन्हें पता चला कि वसूल की गई रकम निगम के कोष में जमा नहीं हो रही। इसके बाद उन्होंने जांच टीम गठित करते हुए 2 दिनों के अंदर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए। शुक्रवार को जांच टीम ने पाया कि रसीद के जरिए वसूली हुई है लेकिन निगम के फंड में जमा नहीं हुई है, इसकी रिपोर्ट बनाकर आगे दी जाएगी जिस पर कार्यवाही की अनुशंसा की गई है।

वहीं दुकानदारों का कहना है कि पहले निगम रसीद देकर पैसा वसूलता था और अब रसीद देना बंद कर दिया है, उनकी मांग है कि हमें नियमित रसीद दिया जाए और हमें यहां स्थाई बसाहट दी जाए।

निगम कमिश्नर द्वारा गठित दो सदस्यीय जांच टीम में शामिल बाजार प्रभारी सती यादव ने बताया कि बहतराई में निर्मित दुकानों की जांच की गई तो वहां कई दुकानें बंद पाई गई। 10 दुकानदारों के बयाना लिए गए और उनसे प्राप्त रसीद हासिल किया गया। शुक्रवार को इन रसीदों का निगम की रसीद बुक, रजिस्टर तथा कोष आदि की पड़ताल की गई। इसके बाद जिसके खिलाफ आरोप साबित होगा कार्रवाई,की अनुशंसा की जाएगी।

गौरतलब हैं नगर निगम में पार्षदों के खिलाफ घोटाले के आरोप नए नहीं है। इससे पहले निगम में आवास घोटाला हो चुका है, जिसमें एक पार्षद पर रुपए लेकर मकान आवंटित करने की शिकायत की गई थी। जिन लोगों को मकान नहीं मिले, उन्होंने रसीद लेकर निगम में पूछताछ की तब फर्जी रसीद के जरिए वसूली की बात सामने आई और सदमे में आरोपी पार्षद ने खुदकुशी कर ली थी।

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