रेलवे ने नो- पार्किंग का दायरा बढ़ाने के साथ अब सख्ती शुरू कर दिया है। इसे लेकर रेलवे सिविल डिफेंस की आठ सदस्यीय दो टीम बनाई है। टीम के सदस्य नो पार्किंग जोन में जाकर यात्री, उनके परिजन और आम नागरिकों को समझाइश दे है की अपनी गाड़ियां पार्किंग स्टैंड में रखे, नही तो चालानी कार्रवाई की जाएगी।

स्टेशन के बाहर पार्किंग व्यवस्था संभाल पाने में रेल प्रशासन पूरी तरह फेल है। यही कारण है की गाड़ियों को मनमुताबिक खड़ी कर दी जाती है। इसके चलते यातायात बाधित होता है और यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। लगातार अव्यवस्था और दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए पार्किंग की व्यवस्था सुधारने के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत रेलवे ने नो- पार्किंग का दायरा बढ़ा दिया है। हालांकि यह निर्णय आम जनता के लिए परेशानी भरा है। इसे दरकिनार करते हुए रेलवे ने अब सख्ती बरतना भी शुरू कर दिया है।

नो- पार्किंग में वाहन न खड़े हो और यातायात व्यवस्था सुचारू रहे इसलिए रेलवे ने सिविल डिफेंस को कमान सौंपी है। चार- चार सदस्यों की दो – दो टीमें बनाईं गई है। इस टीम ने अब रेलवे परिक्षेत्र में काम करना भी प्रारंभ कर दिया है। सिविल डिफेंस की टीम एक वाहन में स्पीकर लगाकर नो- पार्किंग क्षेत्र में दौरा कर रही है। इस दौरान, जो भी गाड़ी खड़ी कर रहे हैं, उन्हें तत्काल समझाइश देकर छोड़ दिया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि यह एरिया नो- पार्किंग जोन है। अभी केवल समझा रहे हैं। 17 जुलाई के बाद नो- पार्किंग में खड़ी गाड़ी को गेट नंबर चार के आगे टीआरडी आफिस के पास रखा जाएगा। यहां से गाड़ी वापस तभी मिलेगी, जब गाड़ी मालिक जुर्माना जमा करेगा। एक स्टाफ को प्रभारी नियुक्त किया गया है। वह जुर्माने की रसीद देंगे।


