डायरिया के बाद अब मलेरिया और कोरोना के भी मरीज मिलने से हड़कंप, दो भाइयों की गई मलेरिया से जान।

बिलासपुर जिले में डायरिया का प्रकोप अभी कम नही हुआ था कि मलेरिया और कोरोना के मरीजों के मिलने का सिलसिला शुरू हो गया। वहीं उससे मौत भी होने लगी है। ग्राम लमेर से एक मलेरिया से ग्रस्त युवक को इलाज के लिए सिम्स में भर्ती कराया गया है।

अक्सर यह गंभीर समस्या बरसात के समय ही शहरी क्षेत्र से लेकर स्लम क्षेत्र के घरों घर तक दस्तक देती है।हालांकि इसका जिम्मेदार भी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग है जो हर साल समस्याओं वाले क्षेत्रों की जानकारी रखकर भी उन क्षेत्रों में किसी तरह का कोई ध्यान नही देता। बुधवार का दिन बिलासपुर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए बहुत ही खराब रहा। क्योंकि बुधवार को ना केवल टेंगनमाड़ा निवासी दो सगे भाइयों की मलेरिया से मौत हो गयी बल्कि एक 66 वर्षीय बुजुर्ग भी कोरोना पॉजिटिव पाया गया।जिसके घर वालों की जांच कर उसके ट्रेवल हिस्ट्री खंगाली जा रही है। गौरतलब हो कि टेंगनमाड़ा निवासी दो सगे भाई इरफान और इमरान को भी इसी तरह मलेरिया हुआ। हालांकि ना तो इसकी जानकारी घरवालों को हुई ना ही वे टेंगनमाड़ा के जिस स्वास्थ्य केंद्र पर उन दोनों का इलाज कराने लेकर गए उन्हें इसकी जानकारी हुई।इसलिए साधन संसाधन और सुविधाओं के आभाव में चल रहे शासकीय स्वास्थ्य केंद्र से दोनों भाइयों को बुखार की दवा देकर चलता कर दिया गया। जब देर रात दोनों भाइयों की ज्यादा तबियत बिगड़ी तो परिवार वाले उन्हें गांव के ही झोलाछाप डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे जहां उन्हें ग्लूकोस देकर और इंजेक्शन लगाकर वापस कर दिया गया। अगले दिन सुबह जब बच्चे दर्द से कराहने लगे तो घर वालों ने झोलाछाप डॉक्टर से फिर से सम्पर्क किया और झोलाछाप डॉक्टर को घर बुलाया। इस तरह इरफान की घर पर ही मौत हो गयी। सदमे में आये घर वाले दूसरे बच्चे को आनन फानन में इलाज के लिए कोटा स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे लेकिन शाम को इमरान की भी मौत हो गयी। इसके बाद फिर से दूसरे दिन यानी कि गुरुवार को ग्राम पंचायत लमेर निवासी युवक को मलेरिया हो जाने पर सिम्स में इलाज के लिए भर्ती कराए। जानकारी मिली कि मरीज मनोज मरावी लमेर का रहने वाला है मरीज की तबियत लगातार बिगड़ते जा रही थी। वहीं उन्हें स्वास्थ्य केंद्र तक जाने एम्बुलेंस भी नही मिल रही थी। जिसके बाद ये लोग पैसे खर्च कर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे जहां से उन्हें सिम्स रिफर कर दिया गया। इस तरह जांच में पाया गया कि मरीज को मलेरिया है। फिलहाल मरीज का सिम्स में इलाज जारी है।

शासकीय एवं चिकित्सकीय सुविधाओं को जन जन तक पहुंचाने का ढकोसला करने वाले जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की पोल उस समय खुल गयी जब एक मलेरिया से ग्रसित मरीज को अस्पताल आने तक के लिए शासकीय एम्बुलेंस नही मिला। जिसके बाद परिवार के लोगों को मरीज की जान बचाने निजी एम्बुलेंस के जरिये इलाज के लिए अस्पताल लाना पड़ा। सवाल यही उठ रहा है कि अगर स्लम क्षेत्रों तक एम्बुलेंस नही पहुंच सकी तो निजी वाहन स्लम क्षेत्र तक कैसे पहुंची। इतना ही नही कुछ दिनों पूर्व जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई बाइक एम्बुलेंस का भी कोई पता नही है। लगता है सबकुछ दिखावा और फाइलों तक सीमित है जबकि इसकी जमीनी हकीकत कुछ और है। फिलहाल जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उदासीनता के चलते ही जिले में डायरिया, मेलरिया और अब कोरोना जैसी महामारी घातक बीमारियों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। इसके चलते जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के बाद राज्य शासन स्तर पर भी हड़कम्प मच गया है।

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