स्लम एरिया की जनता खतरे में है। बारिश के दिनों में वैसे भी पानी की वजह से तरह-तरह की बीमारियां फैलती हैं। ऐसे में अगर पाइप लाइन से ही गंदा और मैला युक्त पानी की सप्लाई लोगों के घरों तक हो तो बीमारियों के खतरे का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। नगर निगम के अधिकारी समस्या की तरफ ध्यान दिलाने के बावजूद इसे दूर करने में रुचि नहीं ले रहे।

जूना बिलासपुर के कर्बला मोहल्ले में गंदे पानी की शिकायत से जूझ रहे वार्ड वासियो का कहना है कि जनप्रतिनिधि निगम प्रशासन से शिकायत कर थक चुके हैं अब तक व्यवस्था जस की तस बनी हुई है गंदा पानी पीने आज भी लोग मजबूर हैं। इन दिनों करबला के कई घरों में गंदा पानी आ रहा है। हालांकि लोगों ने निगम में इसकी शिकायत की है। इधर गंदा पानी आने से लोगों को डायरिया फैलने का डर सता रहा है। करबला क्षेत्र के लोगों ने बताया कि नलों से कई दिन साफ तो कई दिन गंदा पानी आता है। लोग सावधानी के लिए पानी को उबालकर पी रहे हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पाइप लाइन में लीकेज के चलते गंदा पानी आने की आशंका है। वार्ड वासियों का कहना है यहां काफी समय से गंदा पानी आ रहा है। इस की शिकायत निगम वार्ड पार्षद सहित प्रशासन से भी कर चुके हैं अब तक इस ओर प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है।



नगर निगम शहर के नागरिकों के स्वास्थ्य को लेकर कितना संवेदनशील है यह इस बात से पता चलता है कि निगम निगम में शिकायत के बावजूद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा हैं, वर्तमान में शहर की आबादी 3 लाख 50 हजार से अधिक है। इनमें से मात्र 1 या 2 फीसदी लोग ही निजी ट्यूबवेल के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। आबादी का बड़ा हिस्सा नगर निगम से सप्लाई होने वाले पानी पर निर्भर है। इसमें से स्लम एरिया में रहने वाली बड़ी आबादी भी शामिल है। गंदे पानी की वजह से बीमारी का खतरा इन क्षेत्रों में अधिक होता है, कारण यह है कि आम तौर पर ये लोग पानी के इस्तेमाल में जरूरी सावधानी नहीं बरतते। यहां के अधिकांश लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होती कि ऊपर से साफ नजर आ रहा पानी भी गंदा हो सकता है। ऐसे पानी का उपयोग करने से प्रतिदिन लोग बीमार पड़ रहे हैं। ऐसे में यहां शुद्ध पानी मुहैया करवाने की जवाबदारी नगर निगम की है, लेकिन अमला इस मामले में बेहद लापरवाह है। लोगों को गंदा पानी मिल रही है। आम लोगों की बात को कोई सुनता नहीं, अगर कोई उन्हें समस्या बताता भी है तो वे अनसुनी कर देते हैं। जनप्रतिनिधियों के बारे में तो अफसरों की स्पष्ट सोच है कि वे जानबूझकर इस तरह के मामले को तूल देते हैं। समस्या दूर करने की बजाए वे पूरे दिन इसी में लगे रहते हैं कि इस तरह की जानकारियां कौन दे रहा है। नगर निगम का जल विभाग हर महीने पानी की जांच करवा रहा है, लेकिन इसकी रिपोर्ट में क्या है यह कोई नहीं बता रहा। हाल ही में शहर के कुछ वार्डों के पानी का सैंपल जांच के लिए पीएचई के लैब में भेजा गया है।





