बिलासपुर के पुराना बस स्टैंड की बहुमूल्य जमीन को कांग्रेस भवन के लिए आवंटित करने के मामले में कांग्रेस ने अभी तक आवश्यक शुल्क जमा नहीं किया है, जिसकी अवधि इसी साल अगस्त में पूरी हो जाएगी और अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर आवंटन स्वतः रद्द हो जाएगा। इधर इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका लगाने वाले पक्षकार अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है।

कांग्रेस शासनकाल में नए कांग्रेस भवन के लिए पुराने बस स्टैंड में जगह आबंटित की गई है, और इसके लिए कांग्रेसियों को जमीन का शुल्क पटना था, लेकिन कांग्रेसियों द्वारा आज तक शुल्क जमा नहीं किया गया है, शुरू में भवन के जमीन के लिए हो हल्ला हुआ था। अब जमीन अलाट कर दी गई है तो कांग्रेसी जमीन का शुल्क जमा नही करने तरह-तरह के बहाने बना रहे है। कांग्रेसियों का कहना हैं कि मामला हाई कोर्ट में चला गया, जिसके कारण हमने शुल्क अदा नहीं किया, यदि शुल्क पटा देते तो हमारी राशि फंस जाती ।वही उनका कहना है इसके बाद कलेक्टर को अधिकार दिया गया है कि इसका निराकरण किस प्रकार से हो। कांग्रेसियों ने बताया कुछ व्यापारियों ने इस जमीन को लेकर हाईकोर्ट में फिर से याचिका लगाई है और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कह रहे हैं ।कांग्रेस जिला शहर अध्यक्ष विजय पांडे का कहना है की पूरी तरह से निराकरण होने के बाद ही पैसा जमा किया जाएगा, हमने जिला कलेक्टर से शुल्क जमा करने 6 माह का समय मांगा है ताकि सारे मामले का निराकरण हो सके।

दरअसल 2 साल पहले 2022 में छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर पुराना बस स्टैंड की जमीन के एक हिस्से को कांग्रेस भवन के लिए आवंटित किया था लेकिन इसके खिलाफ हाई कोर्ट में रजनीश ताम्रकार ने जनहित याचिका दायर कर दी, जिसमें इस जमीन का सार्वजनिक हित में उपयोग होने की मांग की गई थी। इसी सप्ताह के सोमवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने बिलासपुर कलेक्टर को कांग्रेस की तरफ से दिए गए आवेदन पर दो सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है, इसके साथ ही जनहित याचिका निराकृत कर दी गई। अब जमीन आवंटन के एवज में भू भटक सहित अन्य शुल्क के रूप में एक करोड़ 70 लाख रुपए जमा करने को कहा गया है । यह राशि पीसीसी द्वारा जमा की जानी है। वैसे फरवरी 2024 में पत्र लिखकर कांग्रेस ने यह रखा रकम जमा करने के लिए और समय मांगा था लेकिन अब तक इस पर निर्णय नहीं लिया जा सका। इधर राज्य सरकार की तरफ से बताया गया है कि आवंटन की शर्तों के अनुसार 2 साल में रकम जमा नहीं करने पर आवंटन खुद ही निरस्त हो जाएगा और यह अवधि अगस्त में पूरी हो जाएगी। इधर याचिका कर्ता के वकील अभिजीत सरकार का कहना है कि चूंकि यह मामला मेरिट के आधार पर नहीं हुआ है इसलिए वे सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। शायद ही वजह है कि एक बार फिर से कांग्रेसी रकम जमा करने से डर रहे हैं।






