सावन माह की शुरुआत 22 जुलाई सोमवार के दिन से हो गयी है। सावन माह में झारखंड स्थित देवघर में जलाभिषेक के लिए लगातार कावड़ यात्री रेल मार्ग से रवाना हो रहे हैं। सनातन परंपरा में श्रावण मास में की जाने वाली कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है। हर साल लाखों श्रद्धालु सुख-समृद्धि की कामना के साथ इस पावन यात्रा के लिए निकलते हैं। भगवान भोलेनाथ का ध्यान कर श्रद्धालु लंबी दूरी तय कर पैदल चलकर भगवान शिव को जल चढ़ाते हैं। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में कावड़ यात्रा की जाती है। बरसों से कावड़ यात्रा की परंपरा चलती आ रही है।



आज भी उसी परंपरा का अनुपालन करते हुए श्रावण मास में जल लेकर लाखों लोग भगवान शिव पर चढ़कर अपनी कामनाओं की पूर्ति करते हैं। पूरे सावन भर में कावड़ यात्रा कर भगवान शिव को जल चढ़कर प्रसन्न किया जाता है। श्रावण के महीने में कावड़ लेकर जाने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा होती है। शिव भक्त कावड़ को बांधकर कंधों पर लटकाकर अपने कावड़ यात्रा की शुरुआत करते हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सबसे पहले कावड़ यात्रा की शुरूआत भगवान परशुराम ने की थी। भगवान शिव को समर्पित इस कावड़ यात्रा में श्रद्धालु पवित्र गंगाजल से अपने इष्ट देव पर जलाभिषेक करते हैं। बिलासपुर रेलवे स्टेशन में बड़ी संख्या में कावड़ यात्रा के लिए निकले श्रद्धालु नजर आए जो हर हर महादेव का जयकारा लगाते हुए कावड़ यात्रा के लिए रवाना हुए।



