शनिवार को पूरे विधि विधान के साथ मां मनसा देवी की पूजा अर्चना की गई। बिलासपुर के हेमू नगर स्थित प्राचीन मंदिर में पूजा अर्चना में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस अवसर पर भोग प्रसाद का वितरण किया गया।

सनातन परंपरा में ही न केवल नारी को पूजने की परंपरा है बल्कि नारी को ही शक्ति स्वरूप माना जाता है। शक्ति की एक स्वरूप है मां मनसा देवी, जिन्हें माता पार्वती की सौतेली पुत्री माना जाता है। मान्यता है की मनसा देवी का जन्म भगवान शिव के मस्तक से हुआ था इसी कारण इनका नाम मां मनसा पड़ा। एक मान्यता के अनुसार शिवजी के आशीर्वाद से नाक कन्या कद्रू और कश्यप से जन्मी मनसा देवी की पूजा अर्चना से सर्प भय दूर होता है।

भारत के बंगाल में मनसा देवी की पूजा अर्चना पूरे भक्ति भाव से की जाती है। बिलासपुर में भी पाल परिवार द्वारा करीब 200 वर्षों से यह पूजा की जा रही है, उनकी पिछली पीढ़ी बांग्लादेश से कोलकाता और फिर कोलकाता से बिलासपुर देवी की प्रतिमा को लेकर पहुंची। तब से हर वर्ष सावन महीने के अंतिम दिन मां मनसा देवी की पूजा की जाती है। बंगाल की परंपरा के साथ तांत्रिक विधि पूर्वक यहां शक्ति की उपासना की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।


मां मनसा देवी को सांपों की देवी माना जाता है। यह विष की भी देवी है। कहते हैं मां मनसा के प्रसन्न होने से सर्प नहीं कटते और इससे मृत्यु नहीं होती। बिलासपुर के शंकर नगर, हेमूनगर में स्थित मंदिर में हर वर्ष देवी की पूजा अर्चना कर इस प्रतिमा की पूरे वर्ष पूजा की जाती है और फिर नई प्रतिमा की स्थापना के पहले उन्हें घाट पर विसर्जन के लिए छोड़ दिया जाता है।


बंगाल में जिस तरह से माँ दुर्गा की पूजा की जाती है, उसी तरह मां जगद्धात्री और मां मनसा देवी की भी पूजा की परंपरा है। शायद यही कारण है कि बंगाल महिला प्रधान है और वहां सभी क्षेत्रों में महिलाओं को वरीयता हासिल है। मां मनसा देवी भी उसी की प्रतीक है ।शनिवार को मां मनसा देवी की पूजा उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने पूजा अर्चना, पुष्पांजलि के पश्चात भोग प्रसाद ग्रहण किया।


