आरक्षण और वर्गीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए बयान को लेकर विरोध शुरू हो गया है, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग में क्रीमी लेयर का प्रावधान पहले से है, वही एसटी एससी में भी क्रीमी लेयर और वर्गीकरण करने के निर्देश सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं। जिसे लेकर कुछ वर्गों ने इसे सही बताया है तो वहीं कुछ वर्गों ने इसे आसंवैधानिक बताया है, इसे लेकर एसटीएससी ओबीसी महासंघ द्वारा भारत बंद का ऐलान किया गया है।

आरक्षण में क्रीमी लेयर और वर्गीकरण के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय दिया है, जिसके तहत उन्होंने कहा है कि जिस वर्ग की आर्थिक स्थिति मजबूत है उन्हें क्रीमीलेयर में रखा जाए और जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है उसे ही आरक्षण का लाभ दिया जाए, उच्च वर्गों को क्रिमी लेयर वर्ग में रखा जाए हालांकि अन्य पिछड़ा वर्ग में यह व्यवस्था पहले से है, जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग में क्रिमिलेयर की व्यवस्था नहीं थी, जिसके चलते उस वर्ग के अति पीछडे वर्ग में आर्थिक असमानता थी, आरक्षण के लाभ से वह वर्ग वंचित रह जाता था।निर्णय के बाद उन वर्गो को भी फायदा होगा। सभी वर्गों में क्रिमिलेयर के आधार पर वर्गीकरण करने के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है, जिसे लेकर एसटीएससी वर्ग में आक्रोश है और इसका विरोध कर रहे हैं बुधवार को भारत बंद का ऐलान किया गया है।

समसामयिक संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय स्वागत योग्य है कुछ वर्गों का कहना है कि इससे आर्थिक समानता आएगी क्योंकि जिस व्यक्ति को आरक्षण का लाभ मिला है वह आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है, उस व्यक्ति को क्रीमी लेयर वर्ग में रखा जाए क्योंकि आरक्षण का उद्देश्य ही पिछडे लोगों को समाज की मुख्य धारा में लाना है, जब जो वर्ग आर्थिक रूप से सशक्त हो चुका है तो उन लोगों को या उनके बच्चों को क्रिमिलेयर वर्ग में रखा जाए और समाज के उन वर्गों को उसका लाभ दिया जाए जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। निषाद समाज के पदाधिकारी ने बताया कि इससे सामाजिक समानता बढ़ेगी और आर्थिक असमानता दूर होगी। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय स्वागत योग्य है साथ ही उन्होंने कहा भाजपा की केंद्र सरकार भी इसका समर्थन करती है। वही संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर के सोच का यह साकार रूप है।

सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण को लेकर क्रिमिलेयर और वर्गीकरण करने के निर्णय को असंवैधानिक बताते हुए एसटी एससी ओबीसी महासंघ ने भारत बंद का ऐलान किया है, बुधवार को विरोध प्रदर्शन करते हुए सभी से भारत बंद रखने में सहयोग करने की अपील की है हालांकि जानकारों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट का निर्णय समाज के उन वर्गों के लिए फायदेमंद होगा जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं,जिन तक इसका लाभ नही मिल पाया हैं, उन्हें लाभ दिलाना निर्णय का सार हैं। गरीब तबके के लोग को इसका सीधा फायदा होगा। आरक्षण के लाभ से वंचित रह जाते हैं उन्हें संविधान के अनुरूप राजनीतिक शैक्षणिक आरक्षण का लाभ मिल सकेगा गौरतलब है आरक्षण के आधार पर जिन्हें सरकारी नौकरी मिल चुकी है और उच्च पदों पर है तो उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए इन्हें क्रीमी लेयर वर्ग में रखा गया है जबकि समाज के निचले वर्ग के उन लोगों को जिन्हें इसका लाभ नहीं मिला है उन्हें लाभ दिलाने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का उद्देश्य है।

प्रबुद्ध वर्गो का मानना है लोगो को इस निर्णय को लेकर समर्थन करना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट का आभार प्रकट करना चाहिए लेकिन तथाकथित लोग राजनीतिक सामाजिक लाभ को देखते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसे कुछ विद्वान वर्गों ने अनुचित ठहराया है, अब देखना होगा बुधवार को भारत बंद का कितना असर होता है। जाहिर है सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का वही लोग विरोध कर रहे हैं जो आजादी के 77 सालों से इसका लाभ ले रहे हैं और इससे शोषितों को वंचित रखा है। मामले का दुखद पहलू यह है कि अज्ञानता की वजह से वही शोषित वर्ग भी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के विरोध में खड़ा दिखाई दे रहा है, जो उनके स्वयं के हित में है। अर्थात यह वर्ग अपना स्वयं का शत्रु बन गया है जो अपने ही समाज के कुछ उन लोगों को और अधिक साधन संपन्न बनाने के लिए अपने बच्चों का हक मार रहा है।


