बहुला चौथ पर बिलासपुर गौसेवा धाम में गौ अर्चना की गई, गौवंश को स्नान करा कर हल्दी कुमकुम से सुसज्जित कर हरे चारे का भोग आरती एव परिक्रमा कर गौसेवकों ने आशीर्वाद लिया। गौकथा वाचक गोपाल कृष्ण रामानुज दास ने बताया कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुला चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। गायों को समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। भारत कृषि प्रधान देश है। इस में सर्व प्रथम योगदान गौवंश का ही है। बहुला चतुर्थी पर लोग व्रत भी करते हैं। भगवान कृष्ण को गौमाता, नन्हे नन्हे बछड़े बछिया हमेशा प्रिय रही हैं और उन्हें सुरभि गाय से बहुत प्यार था। इस शुभ दिन पर दूध से बने उत्पाद लेना वर्जित है क्योंकि इस दिन उनकी पूजा की जाती है।


ऐसी मान्यता है कि जो भी माताएं बहुला चतुर्थी व्रत कर गौमाता एवं बछड़े के पूजन के साथ साथ गणेश जी की अराधना करते हैं उन निःसंतान माताओं को संतान की प्राप्ति होती है, जिस घर में गौवंश नित्य निवास करते हैं वहां दूध पुत धन संपदा वैभव की कभी कमी नहीं होती। बिलासपुर गौसेवा धाम जहां बीमार, एक्सिडेंट गौवंशो की सेवा का कार्य निरंतर कई वर्षों से चल रहा है इसी गौ सेवा धाम में गौसेवको ने हर्षोल्लास के साथ बहुला चतुर्थी मनाया। इस अवसर पर बिलासपुर गौसेवा धाम के विपुल शर्मा, गोपाल कृष्ण रामानुज दास, शत्रुघन कृष्ण, अनमोल कृष्णा, शिवांश पांडे शुभम शुक्ला, आशीष त्रिपाठी अनिमेष सोनी डॉ. शुभम साहू आदि उपस्थित थे।



