18 C
Bilāspur
Saturday, February 28, 2026
spot_img

बिलासपुर के बाजार में ₹150 किलो बिक रहा मिल्क केक, शुद्धता की जांच संदिग्ध

पिछले दिनों जब यह खबर आई की तिरुपति बालाजी के प्रसाद वाले लड्डू में चर्बी युक्त घी का इस्तेमाल किया गया है तो पूरे देश में एक नई बहस ने जन्म लिया। इसके साथ ही दूध और घी की शुद्धता पर सवाल उठने लगे। हमने भी बिलासपुर में इस पर पड़ताल की। देखिए यह रिपोर्ट।

शैशव काल मे सभी प्रायः प्राणियो के शिशु दूध पीते हैं लेकिन एक उम्र के बाद सभी प्राणी के बच्चे दूध पीना बंद कर देते हैं । मानव ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जो ताउम्र दूध और दूध उत्पादों का प्रयोग करता है। वैसे तो भारत दूध उत्पादन में विश्व में नंबर एक पायदान पर है लेकिन आश्चर्य का विषय यह है कि यहां दूध का जितना उत्पादन होता है उससे करीब चार गुना अधिक खपत है ।यही अंतर संदेह उत्पन्न करता है कि आखिर यह अतिरिक्त दूध आ कहां से रहा है। जाहिर है अधिक मुनाफा की लालच में सिंथेटिक और चर्बी युक्त दूध बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे न केवल आस्था पर चोट हो रहा है बल्कि लोगों की सेहत से भी खिलवाड़ किया जा रहा है। जब से इस बात का खुलासा हुआ है कि जगन सरकार द्वारा खरीदे गए घी में चर्बी मिली हुई थी और इसका इस्तेमाल तिरुपति बालाजी के लड्डू में किया गया तो श्रद्धालु हैरान परेशान है। देश भर में एक नई बहस उत्पन्न हो गई है। लोग पश्चाताप से जल रहे हैं। साथ ही मन में आक्रोश भी है जो चाहते हैं कि आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे धन पशुओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

समाजसेवी अनिल तिवारी भी कहते हैं कि भारत में दूध उत्पादन और खपत के बीच का बड़ा अंतर ही यह प्रमाणित कर रहा है कि यहां सिंथेटिक दूध का बेहिसाब इस्तेमाल हो रहा है। दूध ही नहीं दूध से बनने वाले उत्पादों जैसे पनीर, मक्खन घी में भी नकली पदार्थ इस्तेमाल हो रहे हैं। घी में तो पशुओं की चर्बी मिलाई जा रही है जो गाय या सूअर की हो सकती है, इससे दोनों ही धर्म के लोगों की आस्था तार तार हो रही है।

अनिल तिवारी यह भी कहते हैं कि दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुपालक ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं, जिसे पीने वाले वालों के हारमोंस प्रभावित हो रहे हैं और इस कारण से ही छोटी छोटी बच्चियों में मासिक श्राव देखा जा रहा है, साथ ही नए कपल में भी संतान उत्पत्ति की क्षमता लगातार घट रही है।

दूध को सेहत का आधार माना जाता है लेकिन यही दूध लोगों की सेहत बिगाड़ कर रहा है । जानकार बताते हैं कि केवल मानव ही वयस्क होने के बाद भी दूध का प्रयोग करता है। नकली दूध से बचाव का एकमात्र विकल्प यही है कि वह दूध का इस्तेमाल ही बंद कर दे। तभी दूध माफिया से निपटा जा सकेगा। वैसे इसमें सरकार और सरकारी मशीनरी की भूमिका हमेशा से ही संदेह में रही है, जो अपनी जवाब देही कभी पूरी तरह से नहीं निभाते, जिसके चलते इस तरह के मामले सामने आते हैं।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

132,000FansLike
3,912FollowersFollow
21,600SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles