बिलासपुर में नवरात्रि पर अरपा मैया की महा आरती, 1008 दीप जलाकर हुई भक्ति का आयोजन

सनातन धर्म में प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने की अद्भुत परंपरा है। गाय के दूध से हमें पोषण मिलता है, इसलिए गाय को माता माना जाता है। धरती अन्न के रूप में हमें पोषण देती है इसलिए धरती को भी माता कहते हैं । इसी तरह नदियों से जीवन दायिनी जल की प्राप्ति होती है इसलिए सनातन परंपराओं में नदियों को भी माता और देवी स्वरूप माना जाता है। शारदीय नवरात्र पर देवी आराधना आरंभ हुई तो बिलासपुर शहर के बीचो-बीच से बहने वाली जीवनदायनी देवी स्वरूपा मां अरपा के प्रति भी कृतज्ञता जताने और उनके संरक्षण- संवर्धन के उद्देश्य से अरपा नदी की महा आरती का आयोजन किया गया।

विगत 8 वर्षों से अरपा अर्पण महा अभियान संस्था की ओर से यह आयोजन किया जा रहा है, जो धीरे-धीरे एक उत्सव का स्वरूप लेता जा रहा है। नवरात्र की प्रथम संध्या पर गुरुवार को आचार्य सृजन शर्मा की अगवाई में 21 वेद पाठी पंडितों ने मां गंगा की आरती की। अरपा मैया की आरती के इस अवसर पर 1008 दीप जलाकर जय जय अरपा मैया भी उकेरा गया। बड़ी संख्या में बिलासपुर वासियों ने करीब 45 मिनट तक मंत्रोच्चार के साथ अरपा मैया की आरती की। बिलासपुर की जीवनदायनी अरपा स्वयं खतरे में है ।इसलिए इसके संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता है,

जिसे लेकर अरपा अर्पण महाभियान संस्था के संस्थापक श्याम दुबे और उनके साथी लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह के आयोजनों से अरपा मैया के प्रति भक्ति भाव उत्पन्न होगा। उन्होंने अरपा नदी को गंदा न करने और इसके सीने को छलनी कर बेतहाशा रेत उत्खनन न करने की भी अपील की।गुरुवार संध्या आयोजित अरपा महा आरती में आम और विशिष्ट जन भी पहुंचे, जिन्होंने भी इस आयोजन की खूब सराहना की। जिन्होंने कहा कि गंगा तट पर की जाने वाली आरती की परंपरा यहां आरंभ होगी तो अरपा अरपा मैया के प्रति भी नागरिकों की संवेदनशीलता बढ़ेगी ।विगत कई वर्षों से अरपा अर्पण महा अभियान संस्था द्वारा अरपा नदी को बचाने विविध आयोजन किये जा रहे हैं। यही कारण है कि महा आरती के पश्चात वेंकटेश सेवादार समिति के माध्यम से स्वामी कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य और आरएसएस के नारायण नामदेव द्वारा श्याम दुबे को अरपा पुत्र की उपाधि प्रदान की गई, जिन्होंने कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन अरपा नदी को समर्पित कर दिया है और जिस दिन अरपा संपूर्ण स्वच्छ हो जाएगी, उस दिन उनके जीवन का उद्देश्य पूरा होगा । उन्होंने कहा कि जिस भी शहर में नदी होती है, वहां हरियाली ,धन-धान्य और एक विकसित परिवेश होता है, इसलिए बिलासपुर की जीवन रेखा अरपा के प्रति हम सबको कृतज्ञ होना चाहिए।

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