देवी दुर्गा की उपासना अलग-अलग स्वरूप में की जाती है। शीतला माता भी उन्हें के एक स्वरूप का नाम है। मान्यता है कि देवी शीतला की उपासना से चेचक आदि रोगों से मुक्ति मिलती है। शायद यही कारण है कि एक शताब्दी पूर्व इस स्थान पर इस स्वयंभू मंदिर की स्थापना की गई। बाद में इसके आसपास धर्म अस्पताल बना। नया राज्य बनने के बाद वह सिम्स में तब्दील हो गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मंदिर को उखाड़ फेंकने की लाख कोशिश की लेकिन दैवीय शक्ति के आगे वे बेबस नजर आए।

इसके पीछे शायद उन हजारों मृत आत्माओं की भी शक्ति है जिन्हें लावारिस होने का अभिशाप झेलना पड़ता है मगर उनके कफन- दफन का इंतजाम इसी मंदिर से हो पता है। इस स्वयंभू मंदिर के दर्शन और अपने परिजनों की सेहत में सुधार की कामना लिए आज भी अस्पताल में भर्ती मरीज और उनके परिजन माता रानी के दरबार में आते हैं।




