ग्राम बरेली का सरकारी स्कूल: 4 शिक्षकों की टीम, 88 बच्चों का भविष्य और शिक्षा के प्रति अडिग समर्पण

ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन शासकीय प्राथमिक शाला बरेली संकुल कन्या सीपत इस काम को पूरी निष्ठा के साथ कर रहा है। यहां 3 महिला शिक्षिकाएं और 1 पुरुष शिक्षक सीमित संसाधनों के बीच 88 बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए प्रयासरत हैं। हाल के दिनों में यह स्कूल अज्ञात कॉल्स, मीडिया के दबाव और अन्य चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन शिक्षकों का समर्पण इन सभी बाधाओं से बड़ा है।

प्रधान पाठक का बयान: टीम की सीमाएं और जिम्मेदारी

प्रधान पाठक श्रीमती लक्ष्मी माल्या ने बताया कि पिछले 6–7 दिनों से स्कूल में एक शिक्षक और एक शिक्षिका अवकाश पर हैं। इन परिस्थितियों में केवल 2 शिक्षक ही स्कूल को संभाल रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित होने से बचाने के लिए पूरी मेहनत कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि जिस दिन मीडिया द्वारा सहायक शिक्षिका का वीडियो बनाया और वायरल किया गया, उस दिन भी स्कूल में केवल 2 लोग ही उपस्थित थे। वीडियो में सहायक शिक्षिका को चेयर पर आराम करते हुए दिखाया गया था। प्रधान पाठक ने स्पष्ट किया कि शिक्षिका की तबीयत खराब थी और वह दवा लेकर आराम कर रही थीं। इस मामले में मेडिकल रिपोर्ट और शिक्षिका के बयान संबंधित विभाग को सौंपे जा चुके हैं, लेकिन जांच अभी लंबित है।

धमकी भरे कॉल्स से मानसिक उत्पीड़न

प्रधान पाठक ने आगे बताया कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें और उनकी टीम को अज्ञात नंबरों से धमकी भरे फोन कॉल्स मिल रहे हैं। पहली कॉल सुबह 6:58 बजे आई, जिसमें खुद को “मंत्रालय से अतुल शर्मा” बताने वाले व्यक्ति ने 25,000 रुपये की मांग की। पैसे न देने पर तुरंत सस्पेंड करने की धमकी दी गई। इसके बाद अलग-अलग नंबरों से कॉल्स का सिलसिला जारी रहा, जिसमें कहा गया कि पैसे नहीं देने पर 10 मिनट में नौकरी खत्म कर दी जाएगी।

इन घटनाओं से स्कूल की शिक्षिकाएं और शिक्षक मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को निभाना नहीं छोड़ा।

शिक्षा और बच्चों के प्रति समर्पण

चुनौतियों और तनाव के बावजूद, प्रधान पाठक और उनकी टीम ने बच्चों की पढ़ाई और उनके विकास पर कोई असर नहीं पड़ने दिया। 88 बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ-साथ ये शिक्षक उन्हें नैतिक और सामाजिक रूप से भी मजबूत बना रहे हैं।

समाज और प्रशासन से उम्मीद

यह घटना शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे शिक्षकों की सुरक्षा और गरिमा पर सवाल खड़े करती है। प्रधान पाठक और उनकी टीम ने शिक्षा विभाग से सहयोग की अपील की है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

हमारे समाचार पोर्टल के माध्यम से, हम इन शिक्षकों के समर्पण और संघर्ष को सलाम करते हैं। यह स्कूल केवल बच्चों का भविष्य नहीं गढ़ रहा है, बल्कि ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

हमारी अपील

हम प्रशासन, समाज और शिक्षा विभाग से आग्रह करते हैं कि शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और उनके साथ हो रही मानसिक प्रताड़ना को रोकें। इन शिक्षकों का सम्मान और सहयोग आवश्यक है, क्योंकि यह न केवल उनके लिए, बल्कि 88 बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए भी जरूरी है।

शासकीय प्राथमिक शाला बरेली के शिक्षक शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक हैं। हम उनके प्रयासों और निस्वार्थ योगदान की सराहना करते हैं और इस कहानी को सभी के सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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