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Sunday, March 29, 2026
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*विश्व एड्स दिवस की थीम ‘‘वैश्विक एक जुटता साझा जिम्मेदारी’’ – डॉ. संजय दुबे*

विश्व एड्स दिवस की थीम ‘‘वैश्विक एक जुटता साझा जिम्मेदारी’’ – डॉ. संजय दुबे

   अंचल के प्रतिष्ठित सी.एम. दुबे स्नातकोत्तर महाविद्यालय के एन.सी.सी. कैडेट्स के द्वारा लोगों को एड्स के प्रति रैली, पोस्टर, लेखन के माध्यम से जागरूक किया गया। पूरे विश्व में प्रतिवर्ष 1 दिसम्बर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है।

   इस दिवस को मनाने का उद्देश्य, एच.आई.व्ही. पोजिटिव्ह होने के बारे में लोगों में जागरूकता बढाने उन्हंे शिक्षित करने और एक वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में सबकी समझ विकसित करना है । 

उल्लेखनीय है कि लाल रिबन एच.आई.व्ही. पीड़ित लोगांे के लिए जागरूकता और समर्थन का सार्वभौमिक प्रतीक है। 1 दिसम्बर को विश्व एड्स दिवस को मनाने की शुरूआत वर्ष 1988 से हुई।
शासी निकाय के अध्यक्ष, डॉ. संजय दुबे ने कहां कि एड्स, आटो इम्न्यून रोग है। जिसका ईलाज केवल सावधानी है। जैसे खून देते/लेते समय खून की जॉच की जानी चाहिये एवं नये सीरिंज का उपयोग इनजेक्शन लेते समय किया जाना चाहिये। इस बीमारी को बढ़ते हुए दवाइयों से रोका जा सकता है। फिर भी सावधानी ही बचाव है।

इस अवसर पर डॉ. संजय सिंह, प्रभारी प्राचार्य ने कहां कि ‘‘एच-आई. व्ही. एक प्रकार के जानलेवा इंफेक्शन से होने वाली गंभीर बीमारी है। इसे मेडिकल भाषा में हयूूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस यानि एच.आई.व्ही. के नाम से जाना जाता है। जबकि लोग इसे आमतौर पर बोलचाल की भाषा में एड्स के नाम से जानते है। इस रोग में जानलेवा इंफेक्शन व्यक्ति के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्न्यून सिस्टम) पर हमला करता है। जिसकी वजह से शरीर सामान्य बीमारियों से लड़ने में भी अक्षम होने लगता है।’’

   इस कार्यक्रम में श्री रोहित लहरे एन.सी.सी. अधिकारी ने अपने कैडेट्स एवं छात्र/छात्राओं को जागरूक करते हुए कहा कि एच.आई.व्ही. के लक्षण संक्रमण के स्तर के आधार पर भिन्न होते हैं। प्रारंभिक संक्रमण के बाद पहले कुछ हफ्तों में व्यक्ति को किसी तरह के लक्षणों का अनुभव नहीं होता है या बुखार, सिरदर्द, दाने या गले में खराश सहित इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। एड्स है जानलेवा बीमारी है इसे मिटाना है यह हम सबकी जिम्मेदारी है। 

इस रैली में सहभागिता विशेष रुप से रूपेश वस्त्रकार, आर्यन सिंह, साहिल टंडन, शबनम जोल्हे, सूरज कश्यप, जयपाल लहरे, टिकेश्वर गुप्ता आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

                                            (प्रभारी प्राचार्य)
                                     सी.एम.दुबे स्नाकोत्तर महाविद्यालय
                                         बिलासपुर (छ.ग.)

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