
मोपका चौकी पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए छात्राओं और उनके परिजनों ने बिलासपुर के एसपी कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और मामले को नजरअंदाज कर दिया।घटना से आक्रोशित परिजनों ने कहा कि यदि पुलिस ने समय पर कार्रवाई की होती, तो इस घटना को रोका जा सकता था।एसपी कार्यालय पहुंचे परिजनों ने कहा कि बच्चियों के साथ जो हुआ, वह बेहद शर्मनाक है। पुलिस ने पहले कदम उठाए होते तो यह नौबत नहीं आती।शिक्षक ने कहा कि यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। हमें छात्राओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। परिजनों का कहना है कि मामले में चौकी प्रभारी संजीव सिंह खुद को बचाने के लिए ये मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं। हमारी लड़ाई सिर्फ न्याय के लिए है।चौकी प्रभारी ने कहा की हमारे ऊपर जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह गलत और आधारहीन हैं। मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी।वहीं इस पूरे मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उदयन बेहार ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच तेज की जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।मामले ने तब और तूल पकड़ा जब मोपका चौकी प्रभारी ने इसे राजनीति से प्रेरित बताते हुए गंभीरता से लेने से इनकार कर दिया। चौकी प्रभारी ने परिजनों पर राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया, लेकिन परिजनों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।इस घटना के बाद अब सवाल यह उठता है कि क्या पीड़ित छात्राओं को न्याय मिल पाएगा।क्या यह मामला राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है, या पुलिस अपनी गलती छिपाने की कोशिश कर रही है।जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा।




