एक बार फिर सिम्स हॉस्पिटल में चिकित्सा लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिससे पूरे शहर में हड़कंप मच गया है। एक गर्भवती महिला को कथित रूप से गलत इंजेक्शन दे दिए जाने के कारण उसके पांच महीने के गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद परिजनों में भारी आक्रोश है और उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। गम्भीर और घोर लापरवाही का पूरा मामला सिम्स हॉस्पिटल का है, जहां गिरिजा नाम की गर्भवती महिला का इलाज चल रहा था। आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण उसे गलती से गर्भपात कराने वाला इंजेक्शन दे दिया गया, जिससे उसका गर्भ गिर गया। बताया जा रहा है कि यह इंजेक्शन दूसरी महिला, कविता, के लिए था, लेकिन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की घोर लापरवाही की वजह से इसे गिरिजा को लगा दिया गया। गिरिजा और उसके परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने इस बड़ी गलती पर अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगा, तो उन्हें संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। इसके बजाय, अस्पताल के अधिकारियों ने मामले को दबाने की कोशिश की। लेकिन जैसे ही यह खबर फैलनी शुरू हुई, परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस पूरे मामले पर जब सिम्स हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. लखन सिंह और महिला विभाग की एचओडी डॉ. संगीता जोगी से सवाल किए गए, तो उन्होंने किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि गिरिजा को पहले से ही ब्लीडिंग की समस्या थी और इसी कारण उसे कोटा से सिम्स हॉस्पिटल रेफर किया गया था। उनके अनुसार, किसी भी गलत इंजेक्शन का मामला नहीं है और यह एक स्वाभाविक गर्भपात हो सकता है। हालांकि, गिरिजा के परिजनों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर जानबूझकर सच्चाई छिपाने और लापरवाह डॉक्टरों को बचाने का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि गिरिजा का स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक था, लेकिन अस्पताल की लापरवाही के कारण उसके शिशु की मौत हो गई। वे चाहते हैं कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी डॉक्टरों एवं नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

बहरहाल सिम्स प्रबंधन ने इस पूरे मामले की जांच पड़ताल करने के बाद ही मामले का खुलासा कर दोषियों पर कार्यवाही करने की बात कही है,लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में दोषियों को सजा मिलेगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। इस घटना ने फिर से यह साबित कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों खासकर सिम्स जैसे संभाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में मरीजों की जान कितनी सस्ती है।ऐसे में जरूरत इस बात की है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाए। नहीं तो आने वाले समय में ऐसी लापरवाहियों के शिकार और भी कई लोग बनते रहेंगे।




