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Saturday, February 28, 2026
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महंत बाड़ा भूमि विवाद का निपटारा, सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर समिति को सौंपी गई जमीन…

थाना सिविल लाइन क्षेत्र अंतर्गत जरहाभाठा मिनी बस्ती स्थित महंत बाड़ा भूमि विवाद का आखिरकार निपटारा हो गया। दो वर्षों से लंबित इस विवाद पर सिटी मजिस्ट्रेट ने हिंदू सतनामी महासभा समिति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए महंत बाड़ा समिति को भूमि सौंपने का आदेश जारी किया। इस आदेश के आधार पर मंगलवार को सिविल लाइन पुलिस की मौजूदगी में महंत बाड़ा समिति के अध्यक्ष डॉ. बसंत अंचल और अन्य सदस्यों को भूमि का आधिकारिक कब्जा सौंप दिया गया। गौरतलब हो कि मजिस्ट्रेट के इस फैसले का मिनी बस्ती के स्थानीय निवासियों ने विरोध किया और महंत बाड़ा के मुख्य द्वार को बंद कर दिया। विरोध इतना बढ़ गया कि पुलिस और पत्रकारों के वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई। माहौल को बिगड़ता देख सिविल लाइन थाना प्रभारी तत्काल मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाइश देकर शांति बनाए रखने की अपील की। इसके बाद स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आई और पुलिस ने स्पष्ट किया कि वे न्यायालय के आदेशानुसार भूमि का वैधानिक हस्तांतरण कर रहे हैं। साथ ही, समिति के अध्यक्ष को महंत बाड़ा का ताला-चाबी सौंप दी गई है।गौरतलब है कि महंत बाड़ा को लेकर यह विवाद पिछले दो वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन था। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तनावपूर्ण माहौल बना रहा और कई बार विवाद बढ़ने के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इस विवाद के चलते महंत बाड़ा समिति के अध्यक्ष डॉ. बसंत अंचल और राजमंतो के साथ अभद्रता करने की घटनाएं भी सामने आई थीं। बढ़ते विवाद को देखते हुए मामला अदालत तक पहुंचा, जहां दोनों पक्षों की सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने हिंदू सतनामी महासभा समिति के पक्ष में निर्णय दिया। न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन ने पुलिस बल की निगरानी में हिंदू सतनामी महासभा समिति को महंत बाड़ा का अधिकार सौंप दिया। हालांकि स्थानीय निवासियों में इस फैसले को लेकर असंतोष बना हुआ है और विरोध के स्वर अभी भी सुनाई दे रहे हैं।स्थानीय निवासियों का कहना है कि बसंत अंचल के द्वारा स्थानीय निवासियों को सामाजिक तत्व कहा गया है इतना ही नहीं उनके द्वारा स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वह स्थानीय निवासियों को महत वाडा में प्रवेश होने नहीं देंगे। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मजिस्ट्रेट साहब ऐसा फैसला सुना ही नहीं सकते।और वह भी इस फैसले के खिलाफ है अगर फिर भी भविष्य में स्थानीय निवासियों पर सख्ती बरती गई तो उनके द्वारा उग्र प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा।

अब इस फैसले के बाद सवाल यह उठता है कि क्या इस भूमि विवाद का मामला यहीं समाप्त हो गया है, या फिर आगे यह कोई नया मोड़ लेगा।स्थानीय स्तर पर विरोध अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है, लेकिन प्रशासनिक आदेश के बाद महंत बाड़ा पर हिंदू सतनामी महासभा समिति का अधिकार औपचारिक रूप से बहाल हो चुका है।अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में इस फैसले का क्या असर पड़ता है और क्षेत्र में शांति बनी रहती है या फिर कोई बड़ा आंदोलन होगा।

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