बिलासपुर के सरकंडा क्षेत्र सुभाष चौक स्थित श्री पीतांबरा पीठ बगलामुखी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित भागवत कथा और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों के बीच एक असामाजिक तत्व द्वारा लगातार मंदिर के पीठाधीश्वर आचार्य दिनेश चंद्र महाराज सहित अन्य संतों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की घटनाओं ने समूचे संत समाज को व्यथित कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थानीय निवासी निखिल पांडेय नामक युवक द्वारा बीते कुछ दिनों से लगातार मंदिर में आने वाले संतों को निशाना बनाया जा रहा है। मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान वह जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न करता है, पूजा के समय श्रद्धालुओं से धक्का-मुक्की करता है और जबरन बीच सभा में कुर्सी लगाकर बैठ जाता है, जिससे श्रद्धालुओं के आवागमन में बाधा उत्पन्न होती है। इस संदर्भ में पीतांबरा पीठ के पीठाधीश्वर डॉ. दिनेश चंद्र आचार्य द्वारा सरकंडा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी, किंतु आश्चर्यजनक रूप से आरोपी को थाने से ही तुरंत जमानत पर छोड़ दिया गया। इससे उसका दुस्साहस और भी बढ़ गया है और वह अब खुलेआम संतों को अपशब्द कहकर धमकाने लगा है। इस घटना से आहत आचार्य दिनेश चंद्र महाराज एवं अन्य संतों ने शनिवार को प्रेस क्लब पहुंचकर मीडिया से चर्चा की और अपनी व्यथा को सार्वजनिक रूप से व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर नवरात्रि जैसे पवित्र पर्व पर भक्तगण भक्ति में लीन हैं, वहीं दूसरी ओर एक सिरफिरे तत्व द्वारा धार्मिक माहौल को बिगाड़ने का प्रयास बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। संत समाज ने एक सुर में प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि ऐसे असामाजिक तत्व के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस न पहुंचे। साथ ही उन्होंने मंदिर परिसर की सुरक्षा बढ़ाने, पीठ के पुजारीगणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा धार्मिक आयोजनों में बाधा डालने वालों को कानून के दायरे में लाने की पुरजोर मांग की। संतों ने चेतावनी भी दी कि यदि शीघ्र कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया, तो संत समाज इस विषय को राज्य स्तर पर उठाने के लिए विवश होगा।




