
जिले के लगभग 300 निजी अस्पतालों में करीब 240 प्रबंधनों ने अपने यहां पदस्थ डॉक्टरों की जानकारी सीएमएचओ को भेज दी है। 20 प्रतिशत अस्पताल प्रबंधनों को कड़ी हिदायत दी गई है कि जल्द जानकारी भेजें। इधर जिन डॉक्टरों की जानकारी प्राप्त हो गई है, उसकी लिस्टिंग शुरू हो गई है। अंतिम प्रक्रिया बतौर संपूर्ण डाटा एमसीआई को भेजा नियम का पालन ही नहीं कर रहे बिना अनुमति और वैध प्रक्रिया हैं। के डॉक्टरों की नियुक्तियां धड़ल्ले से की जा रही हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं। अपोलो अस्पताल से जुड़े फर्जी कॉडियोलाजिस्ट मामले में इस लापरवाही की परतें खुलीं। प्रकरण के उजागर होते ही सीएमएचओ ने पिछले महीने त्वरित संज्ञान लेते हुए। जिन अस्पताल प्रबंधनों ने अपने यहां कार्यरत डॉक्टरों की जानकारी दे दी है। उनकी संपूर्ण बायोडाटा के साथ लिस्टिंग शुरू हो गई है। यह समस्त जानकारी एमआईसी यानी मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के पास भेजी जाएगी। वहां नए सिरे से वेरिफिकेशन होगा।जिले के सभी निजी अस्पताल प्रबंधनों से उनके यहां कार्यरत डॉक्टरों की सूची और संबंधित दस्तावेज तलब करने निर्देश दिए थे। इस निर्देश का जिले के 80 प्रतिशत अस्पताल प्रबंधनों ने ही पालन किया है, 20 प्रतिशत अनदेखी कर रहे हैं जिला स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में करीब 300 छोटे-बड़े निजी अस्पताल हैं। यहां लगभग 600 डॉक्टर्स अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि बहुत से अस्पतालों में एक ही डॉक्टर कई अस्पतालों में पार्ट टाइम पदस्थ हैं। इनमें से ज्यादातर के रिकार्ड सीएमएचओ के पास है ही नहीं। इससे जाहिर है कि किस स्तर पर लापरवाही चल रही है।जिले के लगभग 300 निजी अस्पताल प्रबंधनों को निर्देश दिए गए थे किन उनके अस्पताल में पदस्थ समस्त डॉक्टरों का दस्तावेज प्रस्तुत करें। 80 प्रतिशत अस्पताल प्रबंधनों से जानकारी भेज दी है। 20 प्रतिशत अस्पताल प्रबंधन को कड़ी हिदायत दी गई है कि जल्द जानकारी साझा करें, अन्यथा जांच के दौरान गड़बड़ी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बहरहाल जिन डॉक्टर की जानकारी मिल चुकी है, उनकी विधिवत लिस्ट तैयार की जा रही है। पूर ब्योरा तैयार कर जल्द एमसीआई के पास भेजा जाएगा।




