74वां उर्स-ए-मुबारक का समापन कुल की फातिहा के साथ, कव्वाली और नाते-पाक से गूंजा पुलिस लाइन मैदान कौमी एकता और भाईचारे की मिसाल बना तीन दिवसीय रूहानी आयोजन, बड़ी संख्या में पहुंचे अकीदतमंद

हज़रत सय्यद मदार शाह, हज़रत सय्यद अनवर अली और हज़रत मोहम्मद ग़नी शाह की याद में आयोजित 74वें उर्स-ए-मुबारक का समापन रविवार सुबह कुल की फातिहा के साथ हुआ। पुलिस लाइन स्थित दरगाह शरीफ में तीन दिन तक चले इस रूहानी आयोजन में देशभर से अकीदतमंदों ने शिरकत की। उर्स का आगाज़ 9 मई को कुरान ख्वानी और परचम कुशाई के साथ हुआ था, जबकि रात में गुस्ल, चादरपोशी और नाते-पाक की महफिल से दरगाह परिसर में रूहानियत का माहौल बना।10 मई की रात कव्वाली का शानदार मुकाबला आयोजित किया गया, जिसमें दिल्ली से आए फहीम गुलाम वारिस और मुंबई के हाजी सुल्तान नाज़ा ने अपने कलाम पेश किए।

कव्वालों ने देश की एकता, इंसानियत और शहर की पुलिस व्यवस्था की तारीफ करते हुए सुरों से महफिल में जान भर दी। आयोजन स्थल पुलिस लाइन मैदान में हजारों की संख्या में जायरीन पहुंचे और देर रात तक सूफियाना रंग में डूबे रहे।समापन अवसर पर सीएसपी निमितेश परिहार, सिविल लाइन टीआई एस.आर. साहू सहित कई पुलिसकर्मी एवं गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। उर्स कमेटी ने इसे सिर्फ मजहबी आयोजन नहीं, बल्कि कौमी एकता और सर्वधर्म समभाव का प्रतीक बताया। आयोजन के दौरान सुरक्षा, अनुशासन और सुविधाओं के लिए प्रशासन और पुलिस की भूमिका की भी सराहना की गई।

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